दिल्ली ( प्रतीक सिंह ) : सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा आपराधिक मामलों में निर्णय न देने पर गहरी चिंता जताई है। सोमवार को शीर्ष अदालत ने यह जानकर हैरानी जताई कि झारखंड हाईकोर्ट ने 67 आपराधिक अपीलों पर विचार के बाद भी कोई निर्णय नहीं सुनाया है। इस स्थिति को “चिंताजनक” मानते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की देरी अस्वीकार्य है।

सर्वोच्च न्यायालय ने सभी उच्च न्यायालयों को निर्देश दिया है कि वे एक माह के भीतर उन मामलों की सूची प्रस्तुत करें, जिनमें 31 जनवरी 2025 या उससे पहले आदेश सुरक्षित किया गया लेकिन अभी तक नतीजा घोषित नहीं किया गया। झारखंड हाईकोर्ट की तरफ से जमा की गई रिपोर्ट में बताया गया कि 2022 से 2024 के बीच 56 अपीलें खंडपीठों द्वारा सुनी गईं, जिनमें अभी तक अंतिम निपटारा नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त, 11 अन्य प्रकरणों में एकल पीठ ने भी निर्णय सुरक्षित रखने के बावजूद निर्णय नहीं दिया। यह निर्देश तब आया जब अदालत आजीवन कारावास भुगत रहे चार अभियुक्तों की याचिका पर विचार कर रही थी।




