Delhi : स्ट्राइट ऑफ़ होरमुझ में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर United States, Israel और Iran के बीच, अब केवल तेल आपूर्ति तक सीमित नहीं है। यह इलाका वैश्विक डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है। समुद्र के भीतर बिछे अंडरसी फाइबर नेटवर्क के कारण यह क्षेत्र एक अहम डिजिटल मार्ग के रूप में उभरा है।
वैश्विक डेटा का अधिकांश भाग इन केबल्स के माध्यम से एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक पहुंचता है। भारत को यूरोप, अफ्रीका और पश्चिम एशिया से जोड़ने वाले प्रमुख नेटवर्क, जैसे SEA-ME-WE, AAE-1 और EIG इसी क्षेत्र के आसपास से गुजरते हैं। किसी भी प्रकार की क्षति से इंटरनेट सेवाओं में रुकावट या धीमापन आ सकता है, जिससे बैंकिंग, संचार और डिजिटल सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

ये केबल्स अत्यंत उन्नत तकनीक से बनी होती हैं, जिनमें कांच या प्लास्टिक के सूक्ष्म धागों के जरिए प्रकाश संकेतों द्वारा सूचना का आदान-प्रदान होता है। इन्हें मजबूत बनाने के लिए कई सुरक्षा परतें जोड़ी जाती हैं, ताकि समुद्र की गहराई और बाहरी खतरों से बचाव हो सके।




