Saraikela (संजीव मेहता) : शनिवार को आदित्यपुर की जनता पीने के पानी के लिए सड़क पर उतरे और आदित्यपुर के आकाशवाणी चौक पर एकदिवसीय धरना प्रदर्शन किया. इस कार्यक्रम का नेतृत्व जन कल्याण मोर्चा (जकमो) और आदित्यपुर अधिवक्ता संघ ने संयुक्त रूप में किया. जिनके बैनर तले आकाशवाणी चौक पर आम लोगों के साथ संघ और सोसाइटी के लोगों ने समर्थन देते हुए जनमुद्दों को लेकर भारी एकजुटता दिखाई.
इस महाधरना में मोर्चा के अध्यक्ष और अधिवक्ता संघ के मुख्य संरक्षक अधिवक्ता ओम प्रकाश के साथ मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष शारदा देवी, उपाध्यक्ष देवांग चंद्र मुखी, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष डीएन ओझा, पूर्व डीडीसी डॉ लाल मोहन महतो, राष्ट्रपति से पुरस्कृत शिक्षिका संध्या रानी प्रधान, पार्षद नीतू शर्मा, धनंजय गुप्ता, अवधेश कुमार सिंह, सुधीर चौधरी, महिला नेत्री लीली दास, आदित्य सिंडिकेट सोसाइटी के अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह, सहारा गार्डन सिटी के प्रतिनिधि शशांक गांगुली, वृद्ध शान्ति निकेतन के अध्यक्ष चंद्रमा पांडेय, महासचिव निहार रंजन होर, यादव समन्वय समिति के महासचिव बिरेन्द्र सिंह यादव, डॉ पीके सिंह, ब्याहुत कलवार समाज के प्रतिनिधि राजेश कुमार भगत मुन्ना, अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के नेता वोमल सिंह, देव प्रकाश देवता, पूर्व डीएसपी सरयू पासवान, पूर्व पार्षद अनिता केराई, पत्रकार अन्नी अमृता, बीपी श्रीवास्तव समेत सैंकड़ों की संख्या में आदित्यपुर की जनता शामिल रहे. धरना का संचालन अधिवक्ता सुनील कुमार स्वाई ने किया.

आदित्यपुर जलापूर्ति योजना फैक्ट फ़ाइल ::-
लागत – लगभग 395-400 करोड़ की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका उद्देश्य आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र के 32 वार्डों में रहने वाले 3 लाख से अधिक लोगों को चौबीसों घंटे पाइपलाइन से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है.
मुख्य बिंदु:
* आधारशिला (शिलान्यास) फरवरी 2019, मूल लक्ष्य (Deadline) मार्च 2022 (वर्तमान में विलंबित)
* जल स्रोत (Water Source) खरकई नदी (सरायकेला-खरसावां)
* प्रमुख प्लांट• सपड़ा – 60 MLD क्षमता का ट्रीटमेंट प्लांट (अंतिम चरण में)
* सीतारामपुर : 30 MLD क्षमता का ट्रीटमेंट प्लांट (कार्यशील)
* वितरण नेटवर्क 11 वाटर टावर (पानी की टंकियां) और ~480 किमी पाइपलाइन
* कार्यदायी संस्था जिंदल (Jindal) और प्रीति कंस्ट्रक्शन (Preeti Construction)
* नोडल एजेंसी जुडको (JUIDCO), पेयजल एवं स्वच्छता विभाग
* योजना में देरी और वर्तमान स्थिति विलंब के कारण: वन विभाग (Forest Department) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) मिलने में देरी और पुराने ठेकेदारों की धीमी कार्यप्रणाली (IL&FS का ब्लैकलिस्ट होना).
* हाईकोर्ट का दखल: योजना के वर्षों तक लंबित रहने के कारण झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार से शपथ पत्र मांगा था. वर्तमान स्थिति: परियोजना का अधिकांश काम (जैसे पाइपलाइन बिछाना और टंकियों का निर्माण) लगभग पूरा हो रहा है, लेकिन अभी भी कई क्षेत्रों में ट्रायल रन और सुचारू आपूर्ति का काम बाकी है.
* जल संकट वर्तमान में अधिकांश आबादी पुराने 1960 के दशक के सिस्टम और बोरवेल पर निर्भर है. भूजल स्तर गिरने के कारण गर्मियों के महीनों में क्षेत्रों में भयंकर पेयजल किल्लत हो जाती है.





