दिल्ली (प्रतीक सिंह) : भारत में किशोरों द्वारा किए जा रहे अपराधों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि देखने को मिल रही है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष नाबालिगों से जुड़े 45,000 से अधिक मामलों की सूचना दर्ज की गई। इनमें कुछ अत्यंत गंभीर घटनाएं जैसे हत्या, बलात्कार, डकैती, सेंधमारी और जानलेवा हमले शामिल हैं।

यह प्रवृत्ति न सिर्फ समाज के लिए खतरे की घंटी है, बल्कि परिवारिक मूल्यों में आ रहे बदलाव का भी संकेत देती है। हाल ही में हरियाणा के हिसार जिले में एक छात्र द्वारा अपने सहपाठी को गोली मारने की घटना सामने आई, जिसमें आरोपी ने अपने दादा की बंदूक का उपयोग किया। उसके घरवालों ने इसे अनुशासन और कठोरता से जोड़ा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कई बार घर के लोग ही अनजाने में बच्चों को गलत दिशा में ढकेल देते हैं। इस प्रकार की घटनाएं बताती हैं कि माता-पिता की उपेक्षा, अनुचित परवरिश और बच्चों को उम्र से पहले जिम्मेदारियों या स्वतंत्रता देना समाज में अपराध की नींव रख सकता है। समय रहते इस ओर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है।




