रांची: 31 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में झारखंड के डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) अनुराग गुप्ता को लेकर एक अहम सुनवाई होने जा रही है। जिस पर पूरे राज्य के प्रशासनिक, राजनीतिक दलों सहित आम जनता की निगाहें टिकी हुई हैं। यह मामला राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच मतभेद का कारण बना हुआ है। दरअसल, झारखंड सरकार का कहना है कि मौजूदा डीजीपी अनुराग गुप्ता की नियुक्ति दो साल के लिए की गई है और उनका कार्यकाल अभी समाप्त नहीं हुआ है। इसके अनुसार, डीजीपी का कार्यकाल पूरा होने तक वे अपने पद पर बने रहेंगे। वही दूसरी ओर, केंद्र सरकार का तर्क है कि डीजीपी ने निर्धारित आयु सीमा पार कर ली है, इसलिए उन्हें सेवानिवृत्त (रिटायर) मान लिया जाना चाहिए।

यह विवाद इसलिए और गंभीर हो गया है क्योंकि यह सीधे-सीधे पुलिस प्रशासन की स्वायत्तता और नियुक्ति प्रक्रियाओं से जुड़ा हुआ है। अगर सुप्रीम कोर्ट राज्य सरकार के पक्ष में फैसला देता है तो यह राज्यों को अपने डीजीपी की नियुक्ति में अधिक स्वतंत्रता देगा। वहीं, अगर केंद्र के पक्ष में फैसला आता है, तो यह साफ संदेश होगा कि सेवा नियम और उम्र सीमा सर्वोपरि हैं।इस सुनवाई का असर न सिर्फ झारखंड पर, बल्कि देश के अन्य राज्यों पर भी पड़ेगा, जहां डीजीपी की नियुक्ति और कार्यकाल को लेकर समय-समय पर विवाद उठते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस दिशा में एक मिसाल कायम कर सकता है और यह तय करेगा कि डीजीपी जैसे उच्च पदों पर नियुक्ति और सेवा शर्तें कैसे लागू होंगी। जो सबकी निगाहें 31 जुलाई को होने वाले सुनवाई पर टिकी हैं।




