रांची: झारखंड के चर्चित टेंडर अनियमितता प्रकरण में पूर्व मंत्री आलमगीर आलम की कानूनी चुनौतियां और गहरी हो गई हैं। धन शोधन से जुड़े आरोपों वाले इस मामले में अब अदालत ने सुनवाई की रफ्तार बढ़ा दी है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद विशेष अदालत में प्रतिदिन कार्यवाही शुरू हो चुकी है, जिससे मामले के जल्द निपटारे की संभावना बढ़ गई है।

अदालत ने आदेश दिया है कि प्रमुख गवाहों के बयान सीमित अवधि में पूरे किए जाएं। इसके तहत जांच एजेंसी लगातार दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत कर रही है। इनमें वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड, अनुबंध पत्र, बैंकिंग विवरण और संपत्ति से जुड़े कागजात शामिल हैं। इन साक्ष्यों के माध्यम से कथित अनियमितताओं की परतें खोली जा रही हैं।
सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए जेल में बंद आरोपियों की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कराई जा रही है। इस सूची में पूर्व मंत्री, उनके करीबी सहयोगी और अन्य संबंधित लोग शामिल हैं। अदालत की निगरानी में चल रही यह प्रक्रिया मामले की गंभीरता को दर्शाती है।यह पूरा विवाद उस बड़ी कार्रवाई से जुड़ा है, जिसमें भारी मात्रा में नकदी बरामद की गई थी। जांच एजेंसी का दावा है कि विभागीय ठेकों में अवैध वसूली का संगठित नेटवर्क सक्रिय था। आरोप है कि इस रकम को वैध दिखाने के लिए कई स्तरों पर लेन-देन किए गए।हाल ही में जमानत याचिकाओं पर भी राहत नहीं मिली।
न्यायालय ने साफ संकेत दिया है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तेज सुनवाई आवश्यक है। तय समयसीमा के भीतर गवाहों के बयान इस केस की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।




