पटना: बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। प्रदेश की सियासत इन दिनों नए समीकरणों, आरोप-प्रत्यारोपों और जनसभाओं से गर्मा गया है। सत्ता पक्ष जहां अपनी उपलब्धियों का बखान कर जनता का विश्वास दोबारा जीतने में जुटा है, वहीं विपक्ष बेरोजगारी, महंगाई, कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दों पर सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जदयू और भाजपा गठबंधन अपने जनसंपर्क अभियान के जरिए गांव-गांव तक पहुंच बनाने में लगी है। सरकार द्वारा किए गए सड़क, बिजली, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण जैसे कार्यों को चुनावी मुद्दा बनाया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर राजद नेता तेजस्वी यादव लगातार सभाओं के माध्यम से युवा वोटरों को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। वे रोजगार और भ्रष्टाचार पर हमला बोलते हुए सरकार को घेर रहे हैं। कांग्रेस भी अपने अस्तित्व को मजबूत करने की कोशिश में है और जनता दल (यूनाइटेड) से असंतुष्ट वोटरों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है।

वहीं छोटे-छोटे दल और नए राजनीतिक मोर्चे भी इस बार मैदान में उतरे हुए हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय होने की संभावना बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर भी नेताओं की सक्रियता बढ़ गई है, और हर पार्टी अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए डिजिटल प्रचार का सहारा ले रही है। जैसे-जैसे तारीख नजदीक आ रही है, बिहार की सियासत में बयानबाजी और राजनीतिक रणनीतियों की गर्मी और तेज होती जा रही है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किस पर भरोसा जताती है और बिहार की सत्ता की बागडोर किसके हाथों में जाती है।




