जमशेदपुर : टाटा स्टील लीज नवीकरण होनी है। इसके लिए एक समिति का गठन की जानी है, लेकिन पांचवीं अनुसूचित नियामली को दरकिनार कर उद्योग, समाज सेवा, खेल, कला, संस्कृति विभाग के लोगों को नामित किया गया है। जिसका झारखंड मूलवासी अधिकार मंच ने विरोध जताते हुए रैयत विस्थापितों को शामिल करने की मांग के उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री से की है। मंच के संयोजक हरमोहन महतो ने कहा कि नगर विकास और भू राजस्व विभाग के द्वारा अधिसूचना जारी की है, कि नवीकरण को ले कर समिति गठित की जानी है। जिसमें टाटा कंपनी, एयरपोर्ट और डिमना डैम से हुए विस्थापितों को इस कमेटी में रखा जाय ताकि अपने जायज मांग को सरकार एवं कंपनी के समक्ष रख सके। उन्होंने कहा कि, टाटा कंपनी बनने से पहले 18 मौजा के रैयत खतियान धारी आदिवासी मूलवासी जो विस्थापित हुए हैं।

हुए विस्थापन के खिलाफ काफी अर्शे से मुआवजा, जमीन वापसी, नौकरी रोजगार के लिए आंदोलनरत है। लेकिन इतने वर्षों बीत जाने के बावजूद भी विस्थापितों को न्याय नहीं मिला। लीज नवीकरण के पहले सरकार विस्थापित आयोग बनाकर 18 मौजा के विस्थापितों को न्याय प्रदान करें। वैसे इस मामले को लेकर 7 जाविस्थापितों ने झारखंड उच्च न्यायालय सहित जमशेदपुर व्यवहार न्यायालय में भी चुनौती दे रखा है। जो वर्तमान में न्यायालय में लंबित है। अगर आदिवासी क्षेत्र में ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल की अनुमति के बिना नगर विकास एवं भू राजस्व विभाग ने अधिसूचना जारी किया है। जो सरासर गलत एवं असंवैधानिक है।





