दिल्ली ( प्रतीक सिंह ) : सुप्रीम कोर्ट ने बेंगलुरु स्थित संपत्ति से जुड़े एक विवाद में महत्वपूर्ण निर्णय दिया। इस मामले में एक व्यक्ति ने 2007 में 55.50 लाख रुपये में एक रियल एस्टेट डील की थी और प्रारंभ में 20 लाख रुपये जमा किए थे। अनुबंध के मुताबिक, शेष रकम चार महीनों के भीतर देनी थी, लेकिन समयसीमा समाप्त होने तक भुगतान नहीं हुआ।

शीर्ष अदालत ने निचली अदालत के निर्णय को उचित ठहराते हुए कहा कि कानून केवल उन लोगों का संरक्षण करता है जो अपने हितों के प्रति सजग रहते हैं। खरीदार ने न समय पर धन अदा किया, न ही जमा की गई राशि की वापसी की कोई पहल की। अदालत ने कहा कि यह राशि सौदे की गंभीरता दर्शाने के लिए दी गई थी और इसे ‘अर्नेस्ट मनी’ माना गया। यदि अनुबंध पूरा नहीं होता, तो इसे विक्रेता द्वारा रोका जा सकता है। अनुबंध में स्पष्ट था कि यदि समय पर भुगतान नहीं होता, तो दी गई धनराशि खो दी जाएगी। साथ ही यह शर्त दोनों पक्षों के लिए संतुलित थी—यदि विक्रेता समझौते का उल्लंघन करता, तो उसे दोगुनी राशि लौटानी पड़ती। कोर्ट ने इसे निष्पक्ष और वैध व्यवस्था माना।




