Saraikela (संजीव मेहता) : सरकार के साथ अनुबंध के बावजूद स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ पीड़ित सरकारी कर्मियों और उनके परिवार पर निर्भर सदस्यों को चिकित्सा का लाभ नहीं मिल रहा है. ज्ञात हो कि सरकार की सोच थी कि उनके अधीनस्थ कर्मियों और परिवार को अनुबंध के बाद स्वास्थ्य बीमा एजेंसी से जरूरत पड़ने पर लाभ मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है.

एक तो इस एजेंसी के पैनल में झारखंड के अच्छे अस्पतालों का नाम ही नहीं है जहां अच्छी चिकित्सा मिल सके. चिकित्सा कराने पर किसी तरह का लाभ नहीं मिल पा रहा है बल्कि लोगों को अपना पैसा लगाना पड़ रहा है. जिससे एजेंसी के प्रति झारखंड राज्य कर्मियों में काफी आक्रोश है. कर्मचारी महासंघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शशांक गांगुली ने कहा अभी हाल में सुवर्ण रेखा परियोजना में कार्यरत रामनाथ माझी की पत्नी शांति माझी का कैंसर का इलाज चले रहे शहर के बड़े हॉस्पिटल TMH के मेहरबाई में 65000 के बिल का भुगतान करना पड़ा, फिर स्वास्थ्य बीमा योजना का क्या औचित्य?जबकि कर्मियों/पेंशन धारियों से प्रीमियम के रूप में सालाना 6000 रुपए लिया जा रहा है. गांगुली ने माननीय मुख्य मंत्री हेमंत सोरेन जी से इस पर हस्तक्षेप करने की मांग की है. श्री गांगुली ने कहा जब एक आदिवासी कर्मी की पत्नी के मामले में ऐसा हो रहा है फिर तो आम कर्मचारी इस एजेंसी से क्या उम्मीद रखे. घटना की विस्तृत जानकारी के लिए महासंघ का एक शिष्ट मंडल माननीय मुख्यमंत्री से मिलेगा.




