Saraikela (संजीव मेहता) : राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT), जमशेदपुर के चन्द्रशेखर चौधरी (पंजीकरण संख्या: 2017RSMM001) ने अपने पीएच.डी. शोधप्रबंध “Practical Analysis of Thermoelectric Materials for Power Generation: Principles, Classes of Materials and Emerging Applications” का सफलतापूर्वक बचाव किया.
यह पीएच.डी. डिफेन्स सेमिनार हाइब्रिड मोड में आयोजित किया गया, जिसमें प्रत्यक्ष उपस्थिति के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यम से भी प्रतिभागियों ने भाग लिया. इस अवसर पर ओरल एग्ज़ामिनेशन बोर्ड के सदस्य, संकाय सदस्य तथा शोधार्थी उपस्थित थे और उन्होंने अकादमिक चर्चा में सक्रिय भागीदारी निभाई. शोधप्रबंध के बाह्य परीक्षक के रूप में डॉ. बंकिम चन्द्र त्रिपाठी, CSIR–Institute of Minerals and Materials Technology (CSIR-IMMT), भुवनेश्वर उपस्थित थे. यह शोधकार्य प्रो. रंजीत प्रसाद के निर्देशन में तथा डॉ. रामकृष्ण के सह-निर्देशन में संपन्न हुआ.

अपने प्रस्तुतीकरण के दौरान चौधरी ने थर्मोइलेक्ट्रिक पदार्थों के सिद्धांत, उनके विभिन्न वर्गों तथा विद्युत उत्पादन में उनके उभरते अनुप्रयोगों पर विस्तार से प्रकाश डाला. विशेष रूप से उन्होंने अपशिष्ट ऊष्मा (Waste Heat) को उपयोगी विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करने की संभावनाओं पर चर्चा की. यह शोध ऊर्जा-कुशल और सतत विद्युत उत्पादन तकनीकों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करता है. परीक्षा बोर्ड के सदस्यों ने इस शोधकार्य की उच्च गुणवत्ता, व्यावहारिक विश्लेषण तथा उन्नत ऊर्जा पदार्थों के क्षेत्र में इसकी प्रासंगिकता की सराहना की. प्रो गौतम सुत्रधार, निदेशक, NIT Jamshedpur ने चन्द्रशेखर चौधरी, डॉ रणजीत प्रसाद एव डॉ राम कृष्णा को बधाई दिया.




