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दिल्ली ( मीना मिश्रा ) : माफी मांगना अक्सर लोगों को कमजोरी या हार मानने जैसा लगता है, लेकिन वास्तव में यह परिपक्वता, संवेदनशीलता और रिश्तों को महत्व देने की निशानी और कला है। जब हम माफी मांगते हैं, तो हम अपने अहंकार से ऊपर उठकर सामने वाले की भावनाओं को समझने की क्षमता दिखाते हैं। यह कदम किसी को नीचा दिखाने या स्वयं को गलत साबित करने के लिए नहीं, बल्कि रिश्ते की गरिमा को बचाने के लिए होता है।
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माफी मांगना प्रेम, सम्मान और भरोसे का पुल है। जिससे रिश्ते मजबूत होते हैं, अहंकार कम होता है और आपसी सम्मान बढ़ता है। इसलिए माफी मांगने से कभी हिचकिचाएँ नहीं, क्योंकि यह “हार” नहीं, बल्कि “रिश्तों को जीतने” की कला है।
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