रांची : झारखंड के आपूर्ति विभाग में चल रहा है कालाबाजारी माफियाओं का गठजोड़ सिंडिकेट। जिसमें अनाज कालाबजारी माफिया अधिकारी, दलाल ,डीएसडी सभी मिलकर गरीबों की अनाज का कालाबाजारी कर अपनी जेब भर रहे हैं। एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि झारखंड में अनाज कालाबाजारी माफियाओं का एक गठजोड़ सिंडिकेट चल रहा है। जिसमें सभी मिल बाटकर गरीबों की अनाज पर डाका डालकर खुलेआम बाजारों में अवैध कालाबाजारी कर गरीबों को अनाज पर डाका डाल अपनी थैली भर रहे हैं।
लगभग कई वर्षों से विभागीय पदाधिकारी के उपेक्षा का विभाग दंश झेल रहा है। चौंकिए नहीं , झारखंड राज्य के कई जिला है जो विगत कई वर्षों से लगभग विभागीय पदाधिकारियों की पदस्थापना नहीं होने का खामियाजा और दंश झेल रहा है। जहां अनाज कारोबारियों का एकछत्र राज और सिंडिकेट चल रहा है। जहां कई वर्षों से केवल प्रभारी पदाधिकारियों के भरोसे जिले ,प्रखंड का आपूर्ति विभाग चल रहा है। यहां गरीबों का अनाज कालाबाजारी ,माफियाओं और पदाधिकारियों की पेट में जा रहा है। उच्च स्तर पर बैठे लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती है, और अगर किसी माध्यम से इन्हें जानकारी मिल भी जाती है तो एक भ्रष्ट कमाई का एक हिस्सेदार बन जाते हैं। विगत कुछ वर्षों में कई जगहों पर सरकारी अनाज को जप्त कर कई लोगों पर केस दर्ज किया गया। परंतु अभी भी स्थिति जस की तस है,और खुलेआम फिर से कालाबाजारी धड़ल्ले से कर रहे हैंl कई दुकानदारों के ऊपर एवं कलाबाजारी माफियाओं के ऊपर एफ.आई.आर.दर्ज किया गया । कई दुकानदारों को जिले में एक साथ सस्पेंड किया गया । लेकिन स्थिति ढाक के तीन पात ही बनी हुई है। कालाबाजारी माफिया और दुकानदारों में दहशत रहता था जो खत्म हो गया है, और खुलेआम माफिया कालाबाजारी दुकानदारों से सांठगांठ करते हुए देखे जा रहे हैं ।अब प्रखंड आपूर्ति कार्यालय पर ही माफियाओं का जमघट लगना शुरू हो गया है। क्यों कि करवाई कागजी करवाई ही रह गई। वर्तमान जो स्थिति है वह किसी से छिपा हुआ नहीं हैै कि किस तरह कालाबाजारी माफिया ,सफेदपोश,आपूर्ति विभाग के पदाधिकारी एवं स्थानीय प्रशासन से सांठगांठ कर खुलेआम गरीबों के अनाज को बाजारों में ऊंचे मूल्य पर बेचकर माला माल हो रहे हैं। जिसे रोक पाना विभागीय मंत्री और विभागीय सचिव के लिए चुनौती बना हुआ है।प्राप्त जानकारी के अनुसार जहां पदाधिकारियों की सौ रुपया ₹50 ₹200 प्रति बोड़ा हिस्सेदारी के रूप में लिए जाने की चर्चाएं होती है। जिसके बल पर ही कालाबाजारी अनाज माफिया बेधड़क खुलेआम बेरोकटोक के गरीबों के अनाज को ऊंचे मूल्य पर बेच रहे हैं और गरीब अनाज मिलने की आस में हमेशा जन वितरण प्रणाली के दुकानदारों के दुकान के आगे चक्कर लगाते रहते हैं।दो-तीन माह पर एक बार उन्हें अनाज बहुत मुश्किल से इन्हें मिलता है। आम आदमी डीलरों के दुकान के आगे लाइन लग कर दुकान खुलने की इंतजार में बैठे रहते हैं। लेकिन दुकानदार लिंक फेल होने की बहाना बनाकर, तो कभी और कुछ बहाना बनाकर दुकान खुलते ही नहीं हैं, और गरीबों के अनाज गरीबों के मिलने के बजाय, काला बाजारीयो में भेज दिए जा रहे हैं।

इस तरह के मामले कई बार उजागर हुए हैं। एक प्रखंड के आपूर्ति विभाग के गोदाम से प्राप्त जानकारी के अनुसार निकले गेहूं लदे ट्रक पलटी हो गया और उसमें कालाबाजाररीयों से लदे अनाज सड़क पर बिखर गए। जिसे विधायक ने गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कार्रवाई की मांग की थी। जिसके आलोक में ड्राइवर और खलासी पर मामला दर्ज हुआ। अगर सही से कालाबाजारीयों की जांच हो तो जिले के कई प्रखंड के आपूर्ति विभाग इसके तफ्तीश में झुलसेगे और तपेगे। क्यों कि जिले में कालाबाजारीयों के एक मजबूत गठजोड़ है। जिसमें प्रशासन कालाबाजारी माफिया और सफेदपोश के संरक्षण में फल फूल रहे हैं। सरायकेला खरसावां जिले में भी कई बार सरकारी अनाज को पकड़े गए हैं, और मामले भी दर्ज हुए,और वे खुलेआम घूमते रहे हैं। बहुत दिनों के बाद कोर्ट से जाकर बेल लिए। जिसे लूट में छूट करने का मानो लाइसेंस मिल गया हो। कालाबाजारीयो का बड़े पैमाने पर सरायकेला खरसावां में भी अवैध कालाबाजारी हो रहा है। सरायकेला खरसावां जिले के , किसी भी प्रखंड में विभागीय प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी है,ना एजीएम ही, है। प्रखंडों में कालाबाजारी होने को लेकर लोगों के बीच चर्चाओं में राहता है। झारखंड में चल रहे कालाबाजारी माफियाओं की सिंडिकेट को तोड़ना विभागीय मंत्री एवं सचिव एवं वर्तमान जिला आपूर्ति पदाधिकारी के बूते नहीं है ।ऐसी चर्चाएं जोरों पर चल रही है ।देखना यह है कि क्या झारखंड के गरीबों के मसीहा कहे जाने वाले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गरीबों के अनाज कालाबाजारीयो माफियाओं सफेदपोश और पदाधिकारियों पर कार्रवाई कर, इसे रोक पाते हैं या नहीं। यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। विभागीय मंत्री और सचिव इसे कितने गंभीरता से लेते हैं। इस पर अंकुश लगा पाते हैं या नहीं,यह भी आने वाला वक्त ही बताएगा। वही एक पदाधिकारी ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि इस तरह के हो रहे कालाबाजारी एवं कालाबाजारीयो पर अंकुश लगाने के लिए एसआईटी टीम का गठन कर जांच करा कर अंकुश लगाया जा सकता है।




