जमशेदपुर : जमशेदपुर के बर्मामाइंस स्थित ईस्ट प्लांट बस्ती में सूर्य मंदिर परिसर को लेकर उत्पन्न विवादों एवं उसके समाधान के लिए एक महत्त्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक बस्ती के सम्मानित वरिष्ठ नागरिक श्री राम सूरत राम जी की अध्यक्षता में विकास भवन के पास आयोजित हुई। इस बैठक में बड़ी संख्या में बस्तीवासी उपस्थित थे और सभी ने मंदिर की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की।
ज्ञात हो कि इस ऐतिहासिक सूर्य मंदिर की नींव वर्ष 1989 में श्री राम सूरत राम जी, स्वर्गीय बृजनंदन शाही, स्वर्गीय रणधीर सिंह, स्वर्गीय ज्योति दास, स्वर्गीय बुधन सिंह तथा अन्य दानदाताओं के सहयोग से रखी गई थी। मंदिर का निर्माण पूरी तरह से बस्तीवासियों की देखरेख एवं आर्थिक सहयोग से हुआ था, जिनके नाम आज भी मंदिर प्रांगण में अंकित हैं।
मंदिर में सेवा के उद्देश्य से कुछ वर्ष पूर्व कमल नारायण चौबे को पुजारी के रूप में नियुक्त किया गया था। परंतु समय के साथ उनके व्यवहार में बदलाव आ गया। आरोप है कि पुजारी कमल नारायण चौबे, उनकी पत्नी कांति देवी और उनके परिवार के सदस्यों ने मंदिर परिषद के भीतर स्थित खाली जमीन पर कब्जा जमाने की योजना बनाई। उन्होंने यज्ञशाला निर्माण के नाम पर बस्तीवासियों से हस्ताक्षर करवाए और चंदा इकट्ठा किया, लेकिन यज्ञशाला के स्थान पर उन्होंने अपने परिवार के लिए आवासीय मकान बनवा लिया है। जिससे बस्ती वासीयों में आक्रोश व्याप्त है।

स्थिति तब और चिंताजनक हो गई जब पुजारी परिवार ने मंदिर समिति के सदस्यों पर झूठे मुकदमे दायर कर दिए, जिससे बस्तीवासियों में भय का माहौल उत्पन्न हो गया। पुजारी द्वारा महिलाओं को मंदिर में प्रवेश कर पूजा करने से रोकने, यज्ञशाला पर कब्जा जमाने, छठ घाट की जमीन पर पोल और पौधारोपण कर कब्जा करने की कोशिशें भी सामने आईं। इसके साथ ही मंदिर की जमीन को निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
इन तमाम घटनाओं से आक्रोशित होकर एक बार फिर से बस्तीवासी एकजुट हुए और सामूहिक निर्णय के तहत यह बैठक बुलाई गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य मंदिर की प्रतिष्ठा को बचाना, धार्मिक व्यवस्था को पुनर्स्थापित करना तथा सार्वजनिक धार्मिक स्थलों को निजी स्वार्थ से मुक्त कराना था।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि चूंकि मंदिर के संस्थापक सदस्यों में से अब केवल श्री राम सूरत राम जी जीवित हैं, अतः उन्हें यह विशेषाधिकार दिया गया कि वे एक नई मंदिर समिति का गठन करें। यह समिति तीनों मंदिरों — सूर्य मंदिर, यज्ञशाला एवं छठ घाट — के समुचित प्रबंधन की जिम्मेदारी लेगी।
यह भी तय हुआ कि मंदिर परिसर सभी के लिए खुला रहेगा और किसी भी महिला या पुरुष को पूजा-अर्चना करने से रोका नहीं जाएगा। मंदिर की पवित्रता, परंपरा और मूल उद्देश्य को बनाए रखते हुए सभी धार्मिक गतिविधियों को समिति द्वारा नियोजित ढंग से संचालित किया जाएगा। इसके साथ ही मंदिर की सुरक्षा, साफ-सफाई और भविष्य में विकास हेतु योजनाएं बनाई जाएंगी।
बैठक में बस्तीवासियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कीमत पर मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी ने एकमत से कहा कि मंदिर आम जनता की आस्था का केंद्र है, इसे किसी के निजी स्वार्थ का साधन नहीं बनने दिया जाएगा।
इस बैठक के माध्यम से बस्तीवासियों ने एक सशक्त और संगठित स्वर में यह दिखा दिया कि जब बात आस्था, न्याय और सामूहिक अधिकारों की हो, तो वे किसी भी प्रकार के अन्याय के विरुद्ध संगठित होकर खड़े हो सकते हैं। अब सभी की नजर आगामी दिनों में बनने वाली समिति और मंदिर प्रबंधन के नए स्वरूप पर है।




