
हरि शर्मा चाईबासा: सिंहभूम लोकसभा क्षेत्र की सांसद गीता कोड़ा ने कांग्रेस पार्टी को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। भाजपा में शामिल होने के बाद आज वह रांची से चाईबासा पहुंची। जहां भाजपा के कार्यकर्ताओं ने जोरदार ढंग से उनका स्वागत किया।
26 फरवरी को गीता कोड़ा भाजपा में शामिल हो गई थी। इसके बाद पहली बार वह आज चाईबासा पहुंची। चक्रधरपुर और चाईबासा में भाजपा के कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया। आतिशबाजी की गई और लोगों के बीच मिठाई बांटी गई। अपराह्न करीब 3:00 बजे सांसद गीता कोड़ा, उनके पति और पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, भाजपा जिलाध्यक्ष संजय पांडेय के साथ चाईबासा पहुंची। शहीद पार्क चौक पर स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने स्वर्गीय राधे सुंबरूई की प्रतिमा और शहीद स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित की। भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के साथ ही गीता कोड़ा ने मोदी सरकार की प्रशंसा शुरू कर दी है और महागठबंधन पर हमला शुरू कर दिया है। आज पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने राज्य की महागठबंधन सरकार के साथ ही कांग्रेस के आलाकमान को भी निशाने पर लिया। जगन्नाथपुर विधायक सोनाराम सिंकू को कोड़ा परिवार का करीबी माना जाता है और वह अब भी कांग्रेस में बने रहने की बात कर रहे हैं। इस सवाल के जवाब में गीता कोड़ा ने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत विचार होगा कि क्या करेंगे। गीता कोड़ा ने कहा कि झारखंड में जो महागठबंधन की सरकार है, जिसे सब ठगबंधन की सरकार कहते हैं, वह लोगों तक योजनाओं को पहुंचने नहीं दे रही है। आबुआ आवास योजना का हर ओर विरोध हो रहा है, आखिर क्यों। उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार प्रधानमंत्री आवास दे रही है तो राज्य सरकार क्यों नहीं लेना चाह रही है। ऐसा करके राज्य सरकार गरीबों का हक मार रही है। झारखंड का विकास केवल मोदी सरकार ही कर सकती है।पिछले 5 सालों में झारखंड और झारखंडियो की समस्या पर उन्होंने कभी आवाज क्यों नहीं उठाई। इस सवाल के जवाब में गीता कोड़ा ने कहा कि झारखंड के ज्वलंत विषयों पर वह शीर्ष नेतृत्व के पास बातों को हमेशा रखती रही है। कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था, लेकिन बिना किसी कार्य के। झारखंड के दुमका और बरहेट में जो घटना हुई उससे भी अवगत कराया था, लेकिन एक बार भी कोई आवाज नहीं उठी। पूरे राज्य में कानून व्यवस्था खराब है, लेकिन महागठबंधन की सरकार होने के कारण कोई कुछ नहीं बोलता है। कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व ने चुप्पी साध रखी है। तुष्टिकरण की राजनीति हो रही है। आदिवासियों का वोट ले रहे हैं लेकिन विकास नहीं कर रहे हैं। सिर्फ नेतृत्व कोई ध्यान नहीं दे रहा था इसलिए मजबूर होकर उन्होंने कांग्रेस पार्टी को त्याग दिया है। गीता कोड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खूंटी के उलीडीह जाने और राहुल गांधी द्वारा वहां नहीं जाने पर भी खेद व्यक्त किया। आगामी लोकसभा चुनाव में सिंहभूम सीट से उम्मीदवार के रूप में उनको टिकट मिलेगा या नहीं, इस सवाल के जवाब में गीता कोड़ा ने कहा कि इस विषय में वह अभी कुछ नहीं बोल सकती हैं। एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में कार्य करने की जिम्मेदारी दी गई है। उस जिम्मेदारी को निभाएंगी।




