दिल्ली ( प्रतीक सिंह ) : हालिया भारत-पाक संघर्ष ने दक्षिण एशिया में फिर से तनाव बढ़ा दिया। चार दिनों तक चले इस टकराव में पहली बार ड्रोन और मिसाइलों का बड़े पैमाने पर उपयोग हुआ, जिससे आधुनिक युद्ध कौशल सामने आया। भारत ने निर्णायक रुख अपनाते हुए अपनी सैन्य तैयारी का प्रदर्शन किया। इसका उद्देश्य पाकिस्तान को यह स्पष्ट करना था कि अब पहले जैसा नरम रवैया नहीं अपनाया जाएगा।

लाहौर में भारतीय हमलों से भारी क्षति हुई, जिससे पाकिस्तानी सेना की तैयारी पर सवाल उठे। यह संघर्ष उस समय हुआ जब दोनों देशों के बीच पहले से ही कूटनीतिक संबंध तनावपूर्ण थे। भारत ने सिंधु जल समझौते पर पुनर्विचार और वीज़ा पाबंदियों को बनाए रखा है। पाकिस्तान में सेना का वर्चस्व और कट्टरपंथी सोच ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य शक्तियों की मध्यस्थता के बावजूद भारत ने इस बार अलग दिशा में प्रतिक्रिया दी। मोदी सरकार की रणनीति रही है कि पाकिस्तान को मजबूत संदेश दिया जाए। पहलगाम में आतंकी घटना के बाद देश में कार्रवाई का माहौल बन गया था। हालांकि युद्धविराम लागू हुआ, पर यह स्पष्ट नहीं है कि इससे कोई स्थायी समाधान निकलेगा या नहीं।




