
जमशेदपुर: एक बार फिर झारखंड के राजनीति पटल में उथल पुथल हो गया। जब भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता कुणाल सारंगी अपने पद से इस्तीफा दे दिया और ऐसे समय में इस्तीफा दिया जब इधर मोदी की सभा घाटशिला मऊ भंडार में कुछ घंटे बाद होने वाली थी। इसी बीच कुणाल सारंगी ने घोषणा कर दी की पार्टी से नाराज होकर मैं इस पद से इस्तीफा दे रहा हूं।कुणाल के इस घोषणा के साथ राजनितज्ञो में कुणाल के प्रति तरह तरह के कयास लगने लगे। दिनभर पूरा झारखंड कुणाल को लेकर चर्चा में रहा। उसके बाद कुणाल ने खुद शाम में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक से एक बातों को उजागर करते हुए अपनी नाराजगी प्रकट की ,उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनो से उन्हें किसी प्रकार का तजब्बो नहीं दिया जा रहा था।कार्यक्रम में बुलाना तो दूर जानकारी भी नहीं दे रहे थे। इसके पीछे का कारण यह है की 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जो हालात झारखंड में हुई उसके पीछे कुछ भाजपाइयों का ही हाथ था। इसे लेकर आवाज उठाई और कार्रवाई की मांग की लेकिन उच्च अधिकारियों ने इसे दूसरे स्तर पर लिया और हमें ही पार्टी के कार्यक्रमों से दूर करने का साजिश रच डाली। जबकि पार्टी को दुर्गति में ले जाने वाले को मंडल से लेकर जिला सर पर अध्यक्ष पद दे डाला इतना ही नहीं प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम में भी पार्टी के द्वारा मुझे आमंत्रित करना सही नहीं समझा । कुणाल ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि कई लोगों ने लग रहा है की पार्टी ने टिकट नहीं दी इसलिए मैं अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस पर उन्होंने कहा कि टिकट पाना किसका इच्छा नहीं होती है। सब ने तो यही किया लेकिन यहां भी दागी लोगों को टिकट दे डाला जबकि नियम यह है कि किसी भी प्रकार का दागी शख्स को किसी भी पार्टी के द्वारा चुनाव का उम्मीदवार नहीं बनाया जा सकता।
लेकिन इन सब बातों को भाजपा के उच्च अधिकारियों ने नजर अंदाज करते हुए टिकट दे डाली जो आने वाला समय पर प्रदेश प्रवक्ता होने के कारण मेरी फजियत हो सकती थी। और मेरी प्रतिष्ठा भी दांव पर लगा सकती थी।इसी कारण से मैं इस पद से इस्तीफा दे दिया वैसे मैं अभी पार्टी में ही रहूंगा छोड़ने की मेरी मंशा नहीं है।




