बिहार : बिहार की राजनीति में उभरे नीतीश कुमार ने जेपी आंदोलन के बाद सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की, पर 1977 में हरनौत से पहला चुनाव हार गए। 2000 में झारखंड अलग होने के बाद 2005 में बिहार में पहली बार विधानसभा चुनाव कराए गए। नतीजों में किसी दल या गठबंधन को पर्याप्त संख्या नहीं मिली, जिससे कई हफ्तों की राजनीतिक कोशिशों के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया।

उसी वर्ष दोबारा चुनाव हुए और अक्टूबर 2005 में जेडीयू–भाजपा गठबंधन को स्पष्ट बढ़त मिली। नीतीश कुमार पहली बार मुख्यमंत्री बने और 2010 में एनडीए को दोबारा सफलता मिली। 2014 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू के खराब प्रदर्शन के बाद नीतीश ने पद छोड़ दिया और जीतन राम मांझी को नेतृत्व दिया, लेकिन मतभेद बढ़ने पर 2015 में वे फिर मुख्यमंत्री बने। उसी वर्ष महागठबंधन को बड़ी विजय मिली। 2017 में लालू प्रसाद के परिवार पर लगे आरोपों के चलते नीतीश ने गठबंधन तोड़कर फिर एनडीए का साथ पकड़ा। 2020 में कम सीटें मिलने के बावजूद वे मुख्यमंत्री बने रहे।2022 में भाजपा के नेताओं के रुख से नाराज़ होकर नीतीश महागठबंधन में लौट आए, पर यह गठजोड़ भी अधिक समय न टिक सका। जनवरी 2024 में उन्होंने दोबारा एनडीए का दामन थाम लिया और फिर सत्ता की ओर बढ़ने लगे।




