पटना : बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि राज्य की राजनीति में महिला मतदाता निर्णायक भूमिका निभा रही हैं।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को दसवीं बार सत्ता की कुर्सी तक पहुंचाने में महिलाओं का समर्थन अहम रहा। इस बार चुनाव में उनकी जीत का मुख्य आधार वह योजना बनी, जिसके तहत राज्य सरकार ने 1.5 करोड़ महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता ट्रांसफर की।

यह सीधा लाभ न केवल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बना, बल्कि उनके जीवन में एक वास्तविक बदलाव की अनुभूति भी कराया। महिलाओं के लिए चलाई गई विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं—जैसे जीविका समूह, सशक्तिकरण मिशन, छात्रा प्रोत्साहन, आरक्षण, और सुरक्षा उपाय—ने पहले ही नीतीश कुमार की छवि एक “महिला-हितैषी” नेता के रूप में स्थापित कर रखी थी। 10 हजार रुपये का सीधा हस्तांतरण इस छवि को और मजबूत करता दिखा। ग्रामीण इलाकों की महिलाएँ, जो अक्सर सीमित संसाधनों पर निर्भर रहती हैं, इस आर्थिक सहयोग से विशेष रूप से प्रभावित हुईं। नतीजतन वे बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों तक पहुँचीं और अपनी पसंद साफ़तौर पर जताई। महिला मतदाताओं के इस मजबूत समर्थन ने न केवल नीतीश कुमार को ऐतिहासिक दसवीं पारी का रास्ता दिया, बल्कि यह भी संकेत दिया कि बिहार की राजनीति में अब महिलाएँ सिर्फ सहभागी नहीं, बल्कि सत्ता के निर्माण की धुरी बन चुकी हैं। आने वाले वर्षों में भी महिला मतदाताओं का यह रुझान राज्य की राजनीति में स्थायी प्रभाव छोड़ने वाला है।




