दिल्ली ( प्रतीक सिंह ): सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दो लाख रुपये से अधिक नकद लेनदेन पर सख्त टिप्पणी करते हुए इसे कानून का उल्लंघन बताया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में आयकर विभाग को सूचित करना आवश्यक है, ताकि आवश्यक जांच और कार्रवाई हो सके। न्यायालय ने कहा कि देश के सभी न्यायालयों और सब-रजिस्ट्रारों को निर्देश दिया जाता है कि जब भी कोई मामला इस प्रकार के नकद भुगतान से संबंधित हो, तो संबंधित क्षेत्रीय कर प्राधिकरण को इसकी जानकारी दी जाए।

कोर्ट के अनुसार, वित्त अधिनियम 2017 में लागू हुए नियम के तहत दो लाख से ऊपर नकद भुगतान स्वीकार करना प्रतिबंधित है। इस नियम का उद्देश्य अनौपचारिक आर्थिक गतिविधियों पर नियंत्रण और अवैध पूंजी पर निगरानी रखना है। जिन व्यक्तियों द्वारा यह सीमा पार की जाती है, उनके विरुद्ध कर विभाग कार्रवाई कर सकता है। इसमें सर्च ऑपरेशन या दंडात्मक कदम भी शामिल हैं।
यदि कोई व्यक्ति इस व्यवस्था का उल्लंघन करता है, तो धारा 271DA के तहत जितनी राशि नकद में ली गई हो, उतनी ही राशि का दंड अधिरोपित किया जा सकता है। इस प्रकार, यह कानून पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में एक सशक्त कदम है।




