जमशेदपुर : कदमा थाना क्षेत्र में 2019 में हुई एक मारपीट के मामले में, पिछले पाँच वर्षों में एक भी गवाह अदालत में पेश नहीं हुआ है, जिसके कारण यह मामला लंबित पड़ा हुआ है। इस मामले की सुनवाई जिला अदालत के एडीजे-2 आभास वर्मा कर रहे हैं। अदालत ने इस देरी को गंभीरता से लिया है और बार-बार थाने को पत्र भेजकर गवाहों को अदालत में पेश करने का निर्देश दिया था। लेकिन थाने के प्रभारी ने इस निर्देश का पालन नहीं किया और न ही अदालत के पत्रों का कोई जवाब दिया। इस लापरवाही के मद्देनजर, अदालत ने थाना प्रभारी को शो-कॉज नोटिस जारी किया और सशरीर उपस्थित होकर जवाब देने का आदेश दिया था। हालांकि, थाना प्रभारी ने इस नोटिस की भी अवहेलना की और अदालत में पेश नहीं हुए। कोर्ट ने इसे बेहद गंभीरता से लिया और आगे की कार्रवाई के लिए जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को एक पत्र भेजा। पत्र के माध्यम से कोर्ट ने थानेदार की वेतन पर रोक लगाने का आदेश दिया, ताकि उन्हें इस मामले की गंभीरता का अहसास हो सके और आगे की कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा सके।इस पूरे प्रकरण में कदमा थाना में दर्ज जानलेवा हमले के मामले में कुछ मुख्य गवाह हैं, जिनमें अविनाश उपाध्याय, कुनाल साव, शिवम घोष, और कमलेश उपाध्याय शामिल हैं।

ये सभी गवाह अब तक अदालत में पेश नहीं हुए हैं, जिससे मामले की सुनवाई में लगातार विलंब हो रहा है। गवाहों की अनुपस्थिति और पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता इस मामले को और भी जटिल बना रही है।गवाहों की अदालत में गैरमौजूदगी और थाना प्रभारी की लापरवाही के कारण, न्यायालय की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। अदालत का यह कदम—जिसमें थानेदार की वेतन रोकने का आदेश दिया गया है—न केवल पुलिस प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए मजबूर करेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि न्यायिक प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़े। इस प्रकार की कार्रवाई से यह संदेश भी जाता है कि अदालतें कानून के पालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेंगी।




