जमशेदपुर: कहा जाता है कि जमीन का भगवान डॉक्टर होता है और यह 100% सही साबित हुआ जब हाई टेंशन तार की चपेट में आने से झूलसे 13 वर्षीय बालक के दोनों पैर गंवा देने के बाद एमजीएम अस्पताल ने उसे नई जिंदगी दे, उसे अपने पैरों पर खड़ा कर दिया इससे बालक और उसके परिवार वाले काफी खुश है . घटना चक्रधरपुर के गोपीनाथपुर की है जहां 27 सितंबर 2025 के शाम लगभग 6:00 बजे सन्नी गगराई का पुत्र रातू गगराई शौच के लिए खेत जा रहा था जहां टूटे हुए 33 हज़ार हाईटेंशन तार के चपेट में वह आ गया और बुरी तरह से झुलस गया.

किसी तरह परिवार वालों को जानकारी होने पर उसे एमजीएम अस्पताल लेकर पहुंचे जहां बर्न यूनिट के एसोसिएट प्रोफेसर वरीय चिकित्सक डॉक्टर ललित मिंज 60% से ज्यादा जल चुके रातू को ठीक करने का बीड़ा उठाया और लगातार 8 महीने तक डॉक्टर मिंज ने पूरी देखरेख के साथ तीन अलग-अलग ऑपरेशन कर पूरी तरह से स्वस्थ कर दिया. पहला ऑपरेशन 9 नवंबर 2025 को की जिसमें रातू की मां बड़ीलता गागराई के शरीर से चमड़ा ट्रांसप्लांट किया गया, उसके बाद 2 दिसंबर 2025 को दूसरा ऑपरेशन कर झूलसे हुए अंगों को ठीक किया गया लेकिन बुरी तरह से झूलसने से उसके दोनों पैर खराब हो गए थे रातू की जिंदगी बचाने के लिए डॉक्टरो ने ऑपरेशन कर दोनों पैरो को शरीर से अलग कर दिया गया, एक तरफ जिंदगी और मौत की जंग से लड़ रहा था वही रातू अब दोनों पैर भी गंवा चुका था. लेकिन डॉक्टर मिंज की टीम ने हार नहीं मानी और धीरे-धीरे रातू स्वस्थ होने लगा.
इधर डॉक्टर दोनों पैर की जगह कृत्रिम अंग लगाकर खुद के पैर पर खड़ा करने की ठानी जिसमे फाइब्रो हिल नामक कंपनी के एरिया मैनेजर मुकेश चंद्रवंशी ने सहयोग करना स्वीकार किया और 35000 की राशि प्रदान की, वही सोनारी निवासी कृत्रिम पैर बनाने वाले बीके सिंह ने भी अपने स्तर से कम खर्च पर आर्टिफिशियल पैर बना कर दी साथ ही निशुल्क वॉकर भी प्रदान की ताकि रातू आसानी से अपने पैरों पर चल सके. मंगलवार को मिंज के देखरेख और परिवार वालों की मौजूदगी में रातू अपने पैरो पर खड़ा होकर कुछ दूरी चला,इस दौरान वह काफी खुश था उसने कहा कि वह 9वीं का छात्र है अब फिर से अपने पैरों पर चलकर आगे की पढ़ाई पूरी करेगा. वही उसकी मां बड़ीलता बेटे को अपने पैर पर खड़ा होते देख उसके खुशी के आंसू रुक नहीं रहे थे उसने कहा कि जब घटना घटी तो उम्मीद ही छोड़ चुकी थी कि अब उसका पुत्र लौट कर आएगा लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों की कठिन परिश्रम से आज वह अपने पुत्र को फिर से पा लिया है वह काफी खुश है.
इधर डॉक्टर ललित मिंज ने कहा की हर डॉक्टर का कर्तव्य होता है की सबसे पहले मरीज की जान बचाई जाए लेकिन उन्हें अफ़सोस है की उसके दोनों पैर को नहीं बचा सके लेकिन उसके बदले में कृत्रिम पैर लगाने में जिन लोगों ने सहयोग किया उनका काफी आभार व्यक्त करते हैं और उन्हें काफी खुशी भी महसूस हो रही है की रातु अपने पैरो पर खड़ा हो गया.




