
रांची : झारखंड में आसमानी बिजली के दौरान हो रही मौतों की संख्या में काफी वृद्धि हो रही है। पिछले दस सालों में इस घटना से लगभग 2500 लोगों ने जान गंवा चुके है। रांची, खूंटी, हजारीबाग, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम जैसे पांच जिले ‘थंडरिंग जोन’ में आते हैं, जहां बिजली के घातक प्रभाव सबसे अधिक महसूस होते हैं।झारखंड में पिछले पांच सालों में कुल 16 लाख बार गिरी आसमानी बिजली ने राज्य को काफी प्रभावित किया है। इससे सबसे अधिक प्रभावित पूर्वी सिंहभूम जिला रहा है। इसके साथ ही, इन पांच जिलों में अब तक 2014 से 2024 तक 2500 लोगों की मौत हुई है।झारखंड में विभिन्न तरीकों से थंडरिंग होती है, जैसे कि लो क्लाउड और माइक्रोस्पेरिक थंडरिंग। इनमें से लो क्लाउड 80 किलोमीटर ऊंचाई तक धरातल से होती है, जबकि माइक्रोस्पेरिक थंडरिंग 80 किलोमीटर से अधिक ऊंचाई पर होती है।
राज्य सरकार ने अब तक ठनका से बचाव के लिए प्रभावी योजनाएं नहीं बना पाई हैं। बिजली के इंटर क्लाउड और क्लाउड टू ग्राउंड गिरने से दक्षिणी और पूर्वी झारखंड के क्षेत्र प्रभावित रहे हैं।देशभर में वज्रपात के कारण अब तक 400 से अधिक जिले प्रभावित हो चुके हैं, जिससे मौतों में भारी वृद्धि हुई है। राज्य और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकारी की भी कार्य निष्पादन की स्थिति चिंता का विषय है।




