रांची : झारखंड के उद्योग और ऊर्जा परिदृश्य को प्रभावित करने वाले एक महत्वपूर्ण निर्णय में, झारखंड उच्च न्यायालय ने बिजली शुल्क से जुड़े संशोधित कानून और उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने माना कि वर्ष 2021 में लागू किए गए ये प्रावधान संवैधानिक कसौटी पर खरे नहीं उतरते और इनमें तर्कसंगतता का अभाव है।
मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान तथा न्यायमूर्ति राजेश शंकर की पीठ ने यह आदेश पाली हिल ब्रूवरीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका समेत अनेक मामलों की संयुक्त सुनवाई के बाद दिया। इन याचिकाओं में राज्य की बड़ी औद्योगिक इकाइयों, निजी विद्युत उत्पादन करने वाली कंपनियों, इस्पात और खनिज क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं तथा उद्योग संगठनों ने भाग लिया था।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि संशोधित शुल्क व्यवस्था उद्योगों पर अनुचित आर्थिक बोझ डालती है और समान परिस्थितियों वाले उपभोक्ताओं के बीच भिन्न व्यवहार करती है। इससे उत्पादन लागत बढ़ती है और निवेश के माहौल पर नकारात्मक असर पड़ता है। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि ऐसे प्रावधान न्यायसंगत नहीं कहे जा सकते। इस फैसले को राज्य में औद्योगिक गतिविधियों के लिए सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल मौजूदा उद्योगों को राहत मिलेगी, बल्कि भविष्य में निवेश आकर्षित करने में भी मदद मिल सकती है।




