रांची : धालभूमगढ़ में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा फिर से प्रशासनिक प्रक्रियाओं और तकनीकी आपत्तियों में उलझ गया है। केंद्र ने वन भूमि उपयोग की अनुमति देने से पहले राज्य से विस्तृत जानकारी मांगी है, जो समय पर उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। परिणामस्वरूप यह परियोजना फिलहाल अटकी हुई है और क्षेत्रीय विकास पर इसका असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
वर्ष 2019 में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और राज्य सरकार के बीच संयुक्त उपक्रम समझौता हुआ था। उस समय उम्मीद थी कि जमशेदपुर को आधुनिक हवाई सुविधा जल्द मिलेगी, लेकिन छह साल बाद भी कार्य शुरू नहीं हो सका। परियोजना अब तक दस्तावेजों और पत्राचार तक सीमित है।

वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 2024 में 19 महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए, जिनमें पर्यावरणीय प्रभाव और वनीकरण जैसे मुद्दे शामिल हैं। फरवरी 2025 तक इनके संतोषजनक उत्तर नहीं दिए जा सके, जिससे प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। यह हवाई अड्डा कोल्हान क्षेत्र के औद्योगिक विस्तार के लिए अहम माना जा रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन मौजूदा देरी ने इसके भविष्य को अनिश्चित बना दिया है।





