रांची : कानून का सबसे बड़ा उद्देश्य अपराधियों में भय और जनता से मधुर संबंध ही , सच्ची कानून स्थापित करना है। केवल अपराधियों को सजा देना ही नहीं, बल्कि समाज में कानून का ऐसा भय स्थापित करना, है कि कोई अपराध करने से पहले सौ बार सोचे। लेकिन जब हालात ऐसे बन जाएँ कि जिन लोगों को कानून का भय होना चाहिए, वही बेफिक्र होकर सत्ता, प्रभाव और व्यवस्था के कुछ जिम्मेदार लोगों के साथ बैठकर चाय की चुस्कियाँ लेते दिखाई दें, तब सवाल उठना स्वाभाविक है—”साहब, फिर डर कैसे होगा?”
आज आम नागरिक छोटी-सी गलती पर भी भय और असमंजस में रहता है, जबकि कई प्रभावशाली लोग गंभीर आरोपों के बावजूद न केवल निर्भय दिखाई देते हैं, बल्कि उनका आत्मविश्वास यह संदेश देता है कि उन्हें किसी कार्रवाई की चिंता नहीं। यह दृश्य केवल एक तस्वीर नहीं, बल्कि व्यवस्था पर उठते अनेक प्रश्नों का प्रतीक बनता जा रहा है।

विडंबना देखिए, कानून की सख्ती के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। अपराध और भ्रष्टाचार पर “जीरो टॉलरेंस” की घोषणाएँ होती हैं। लेकिन जब व्यवहार में कुछ चेहरे हर परिस्थिति में सुरक्षित और सहज दिखाई देते हैं, तब जनता के मन में संदेह जन्म लेना स्वाभाविक है। यदि कानून सबके लिए समान है, तो उसका प्रभाव भी सब पर समान रूप से दिखना चाहिए।
यह व्यंग्य किसी व्यक्ति विशेष पर नहीं, बल्कि उस सोच पर है जहाँ निकटता, पहचान और प्रभाव कभी-कभी जवाबदेही से भी बड़े दिखाई देने लगते हैं। जब जवाबदेही कमजोर पड़ती है, तब कानून का भय भी धीरे-धीरे समाप्त होने लगता है। और जिस व्यवस्था में भय केवल आम आदमी के हिस्से आए, जबकि प्रभावशाली लोग निश्चिंत रहें, वहाँ न्याय की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
लोकतंत्र में जनता केवल भाषण नहीं, बल्कि व्यवहार देखती है। जनता यह भी देखती है कि किसके विरुद्ध कार्रवाई होती है और कौन हर बार चर्चा के बावजूद बेदाग़ होकर व्यवस्था के गलियारों में मुस्कुराता दिखाई देता है। ऐसे दृश्य विश्वास को कमजोर करते हैं।

समय की मांग है कि कानून की गरिमा केवल कागजों और प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित न रहे, बल्कि उसके प्रभाव का एहसास हर व्यक्ति को समान स्वरूप में दिखाई दे। क्योंकि यदि कानून का भय समाप्त हो गया, तो कानून का सम्मान भी धीरे-धीरे कम होने लगेगा।
आखिरकार जनता का यही सवाल है—”साहब, जिन्हें डर होना चाहिए, वे तो साथ बैठकर चाय पी रहे हैं… फिर डर आखिर होगा किसे?”






