रांची : पश्चिम एशिया में बढ़ते रणनीतिक तनाव का प्रभाव अब ऊर्जा आपूर्ति पर भी स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। हाल में आई रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की ओर से कतर के प्रमुख गैस संयंत्रों को निशाना बनाए जाने के बाद कतर ने एशियाई देशों के लिए तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की डिलीवरी अस्थायी रूप से बंद कर दी है।
इस निर्णय से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है और कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता गहरा गई है।
कतर एशिया के कई बड़े देशों—जैसे चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया—को बड़ी मात्रा में एलएनजी भेजता है। आपूर्ति में इस अचानक आई रुकावट से इन देशों के ऊर्जा क्षेत्र पर दबाव पड़ने की आशंका है। चूंकि कतर विश्व के प्रमुख गैस निर्यातकों में गिना जाता है, इसलिए उसका यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस घटना के तुरंत बाद वैश्विक बाजार में गैस के दामों में तेज वृद्धि देखी गई। कई बाजारों में कीमतें लगभग 40 से 50 प्रतिशत तक बढ़ गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो ऊर्जा क्षेत्र में अस्थिरता और अधिक बढ़ सकती है तथा आयातक देशों को वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़ सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक हमलों का निशाना वे गैस क्षेत्र और प्रोसेसिंग सुविधाएं थीं जो वैश्विक निर्यात के प्रमुख केंद्र हैं। संभावित नुकसान का आकलन और सुरक्षा जांच पूरी होने तक कतर ने एलएनजी शिपमेंट रोकने का निर्णय लिया है।




