रांची : छत्तीसगढ़ के कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया को 19 जून को रायपुर से गिरफ्तार किया गया और शुक्रवार को एसीबी की टीम उसे रांची लेकर पहुंची। जांच अधिकारी डीजी अनुराग गुप्ता ने उससे लंबे समय तक पूछताछ की। इसके बाद मेडिकल जांच कराने के बाद उसे रिम्स अस्पताल से एसीबी अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में बिरसा मुंडा जेल भेजा गया है। इस गिरफ्तारी के पीछे 38 करोड़ रुपये के झारखंड शराब घोटाले में उसके शामिल होने की आशंका है।

सिंघानिया की छत्तीसगढ़ नीति को झारखंड में लागू करवाने की सक्रियता मई 2022 के बाद बढ़ी थी। वह खुदरा शराब दुकानों के लिए मैनपावर आपूर्ति का ठेका ले चुका था और नियम स्वयं ही निर्धारित करवाता था। रायपुर स्थित उसके आवास से बरामद डायरी में इस घोटाले से जुड़े कई विवरण, योजनाएं और सामने आने वालों को ‘मैनेज’ करने की रणनीतियां दर्ज थीं। वहीं, निलंबित आईएएस विनय कुमार चौबे ने हाईकोर्ट में एसीबी की गिरफ्तारी और एफआईआर को निराधार बताते हुए रद्द करने की याचिका दायर की थी, लेकिन शुक्रवार को सुनवाई समय खर्च होने के कारण स्थगित हो गई। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में इसे अगले सप्ताह फिर सूचीबद्ध किया गया है चौबे पर आरोप हैं कि उन्होंने 2022 की झारखंड शराब नीति को छत्तीसगढ़ मॉडल के अनुरूप मोड़ा, जिससे राज्य को भारी आर्थिक नुकसान उठा, और एसीबी व ईडी दोनों एजेंसियां उनके धनशोधन की जांच कर रही हैं हालांकि चौबे ने खुद को निर्दोष बताया है और अदालत में चुनौती दी है कि इस पूरे मामले में उनका कोई योगदान नहीं है। यह कार्रवाई संकेत करती है कि यह घोटाला केवल एक राज्य तक सीमित नहीं, बल्कि दो-पल राज्यों में फैले धांधली के नेटवर्क की जांच हो रही है।




