
जमशेदपुर : जाने क्यों खास है, गुरु पूर्णिमा का पर्व। सनातन धर्म में गुरु पूर्णिमा गुरु और शिष्य के पवित्र संबंध का प्रतीक है। सनातन धर्म में गुरु पूर्णिमा के दिन वेदों के रचयिता वेदव्यास जी का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है।मान्यताओं के अनुसार इस दिन महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था इसलिए गुरु पूर्णिमा को ब्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। महर्षि वेदव्यास को जगत का प्रथम गुरु माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार महर्षि वेदव्यास भगवान विष्णु जी के रूप हैं । वेदों में गुरु को ब्रह्मा विष्णु और महेश का स्वरूप बताया गया है। गुरु के साथ ही माता-पिता को भी गुरु के तुल्य मानकर उनसे सीख लेना चाहिए और उनके सम्मान करना चाहिए। मान्यता है कि गुरु के आशीर्वाद से जीवन को खुशहाल और सफल बनाया जाता जा सकता है।
गुरु पूर्णिमा गुरु और शिष्य के पवित्र संबंध का प्रतीक है। इस दिन शिष्य को अपने गुरु के प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए। यह विशेष पर्व गुरु के प्रति आभार प्रकट करने और सम्मान करने के लिए है।




