रांची : जिंदगी केवल सांस लेने का नाम नहीं है, बल्कि उसे खुलकर जीने का नाम है। आज की भागदौड़ भरी दुनिया में लोग काम, के तनाव और जिम्मेदारियों के बोझ तले इतने दब चुके हैं कि खुद के लिए समय निकालना ही भूल जाते हैं। चेहरे पर मुस्कान कम और चिंता की लकीरें ज्यादा दिखाई देने लगी हैं। ऐसे में यह कहना बिल्कुल उचित है कि खाइए, पीजिए, मौज-मस्ती से रहिए और अकेले गुमसुम मत रहिए, वरना शरीर ही नहीं, मन भी बीमार हो जाएगा।
अकेलापन धीरे-धीरे इंसान को अंदर से कमजोर कर देता है। जब व्यक्ति लोगों से कटने लगता है, अपनी बातें किसी से साझा नहीं करता और हर समय उदास रहने लगता है, तब मानसिक तनाव बढ़ने लगता है। यही तनाव आगे चलकर चिंता, अवसाद और कई शारीरिक बीमारियों का कारण बन जाता है। डॉक्टर भी मानते हैं कि खुश रहने वाले लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक मजबूत होती है। मौज-मस्ती का मतलब केवल घूमना-फिरना नहीं है, बल्कि परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना, हंसना, अपनी पसंद के काम करना और जीवन के छोटे-छोटे पलों का आनंद लेना है।

अच्छा भोजन, स्वस्थ दिनचर्या और सकारात्मक सोच जीवन को बेहतर बनाते हैं। जब इंसान खुश रहता है तो उसके चेहरे की चमक भी अलग दिखाई देती है और वह हर चुनौती का सामना अधिक आत्मविश्वास के साथ कर पाता है। इसलिए जिंदगी को बोझ मत बनाइए। रिश्तों को समय दीजिए, अपनों के साथ बैठिए, दिल खोलकर हंसिए और हर दिन को उत्सव की तरह जीने की कोशिश कीजिए। क्योंकि स्वस्थ शरीर और प्रसन्न मन ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। याद रखिए, खुश रहना भी एक कला है और जो इस कला को सीख लेता है, वह जीवन के हर रंग का आनंद उठा सकता है।





