प्रतीक सिंह नई दिल्ली: अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा (अ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित अरुण शर्मा ने कहा है कि “संगठित समाज ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है और संगठन समाज की, विकास की बुनियाद तथा उसकी रीढ़ है।” उन्होंने कहा कि जब समाज एकजुट होकर सेवा, संस्कार, शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व के मार्ग पर चलता है, तभी स्थायी विकास और सशक्त, समाज ,राष्ट्र का निर्माण का मार्ग प्रशस्त होता है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि संगठन को गांव से लेकर महानगर तक मजबूत करने के उद्देश्य से देश के प्रत्येक राज्य, प्रत्येक जिले और प्रत्येक प्रखंड में व्यापक संगठन विस्तार अभियान चलाया जा रहा है। वे स्वयं तन, मन और धन से इस अभियान को गति देने में जुटे हैं। लगातार जनसंपर्क, समाज जागरण, संवाद कार्यक्रम और संगठनात्मक बैठकों के माध्यम से नए लोगों को जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन आज दिन दूनी, रात चौगुनी गति से प्रगति के पथ पर अग्रसर है।

पंडित अरुण शर्मा ने स्पष्ट किया कि संगठन का लक्ष्य समाज में शिक्षा, संस्कार, आत्मसम्मान, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करना है। इसी दिशा में युवाओं, महिलाओं, बुद्धिजीवियों और समाज के लोगों को जोड़ने का अभियान निरंतर जारी है।
संगठन की राष्ट्रीय महिला अध्यक्षा कल्याणी पांडे के नेतृत्व में महिला प्रकोष्ठ ने उल्लेखनीय विस्तार कर रहा है। उनके मार्गदर्शन में महिलाओं को नेतृत्व, शिक्षा, सेवा, संस्कार और सामाजिक जागरूकता से जोड़ने के लिए विभिन्न राज्यों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। संगठन का मानना है कि नारी शक्ति के सक्रिय सहभागिता के बिना समाज का समग्र विकास संभव नहीं है।
वहीं राष्ट्रीय संगठन महामंत्री छोटेलाल तिवारी की संगठनात्मक कार्यशैली को कार्यकर्ताओं के बीच प्रेरणास्रोत माना जा रहा है। उनके नेतृत्व में पदाधिकारी गांव-और शहर- में लोगों से संवाद कर संगठन की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचा रहे हैं। संगठन का विश्वास है कि वर्तमान समय में “संघे शक्ति, सर्व शक्ति” का सिद्धांत केवल एक श्लोक नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का व्यावहारिक आधार है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि समाज और संगठन के प्रति समर्पण किसी पद या प्रतिष्ठा का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा, सहयोग और सकारात्मक परिवर्तन का संकल्प है। एक जागरूक व्यक्ति केवल अपने परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज की उन्नति के लिए कार्य करता है। संगठन की वास्तविक शक्ति उसके सदस्यों की एकता, अनुशासन, पारस्परिक विश्वास और निस्वार्थ सेवा भावना में निहित होती है।
उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण के साथ संगठन की विचारधारा को सर्वोपरि मानते हुए कर्मपथ पर निरंतर आगे बढ़ते रहें। जब प्रत्येक व्यक्ति सेवा, त्याग, मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व को अपने जीवन का आधार बनाता है, तब समाज में विकास, सद्भाव, आत्मविश्वास और नई ऊर्जा का संचार होता है।

अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा (अ) ने यह संकल्प दोहराया कि वह एक सशक्त, शिक्षित, संस्कारित, आत्मनिर्भर और प्रेरणादायी समाज के निर्माण में राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाएगा। संगठन के पदाधिकारीयों कार्यकर्ताओं का विश्वास है कि आज का यह समर्पण, संघर्ष और संगठनात्मक विस्तार आने वाले समय में इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय लिखेगा ,और यह संगठन समाज, संस्कृति और राष्ट्रहित में अग्रणी भूमिका निभाने वाला एक सशक्त राष्ट्रीय संगठन सिद्ध होगा।






