जमशेदपुर: आज एल. बी. एस. एम. कॉलेज के सेमिनार हॉल में मनोविज्ञान विभाग के तत्वावधान में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए “ इंटरव्यू प्रिपरेशन एंड पर्सनैलिटी डेवलपमेंट” विषय पर एक विशेष व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. किशोर कुमार ओझा (डायरेक्टर, स्कूल ऑफ थॉट मैनेजमेंट) रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार झा ने की।
मुख्य वक्ता डॉ. किशोर कुमार ओझा ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में सफलता केवल डिग्री से नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच, व्यवहारिक समझ और सशक्त व्यक्तित्व से प्राप्त होती है।
उन्होंने साक्षात्कार की तैयारी के विभिन्न चरणों—आत्मपरिचय, बॉडी लैंग्वेज, कम्युनिकेशन स्किल्स, मानसिक संतुलन एवं आत्ममूल्यांकन—पर विस्तार से प्रकाश डाला।

डॉ. ओझा ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे स्वयं को निरंतर पहचानें, अपनी कमजोरियों को अवसर में बदलें और हर साक्षात्कार को सीखने की प्रक्रिया के रूप में लें। उनके व्यावहारिक उदाहरणों ने विद्यार्थियों को विशेष रूप से प्रेरित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए माननीय प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार झा ने कहा कि आज शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।
उन्होंने कहा कि व्यक्तित्व विकास एवं साक्षात्कार कौशल जैसे विषय विद्यार्थियों के करियर निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं, बच्चों को जीवन के हर पहलु में आत्मनिर्भर बनाना है। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सिर्फ अकादमिक ज्ञान से काम नहीं चलेगा। बच्चों को संवाद कौशल, व्यक्तित्व विकास, और आत्म-विश्वास के साथ समाज में अपनी पहचान बनाने की दिशा में भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। अंत में उन्होंने इस सार्थक आयोजन के लिए मनोविज्ञान विभाग की सराहना की।
मंच संचालन मनोविज्ञान विभाग के डॉ. प्रशांत ने किया।
उन्होंने बताया कि डॉ. ओझा द्वारा साझा किए गए अनुभवों और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से विद्यार्थियों को आत्मविश्लेषण, आत्मविश्वास एवं व्यवहारिक दक्षता विकसित करने की नई दिशा मिली है।
उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार के अकादमिक एवं व्यक्तित्व विकास संबंधी कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।
“शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं, बच्चों को जीवन के हर पहलु में आत्मनिर्भर बनाना है।” डॉ. अशोक कुमार झा
कार्यक्रम में डॉ. मौसुमी पॉल, डॉ. सुधीर कुमार, डॉ. रानी डॉ. सलोनी रंजन व बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की सक्रिय सहभागिता रही। अंत में सभी का धन्यवाद ज्ञापन प्रो. प्रमिला किस्कू ने किया और इसी के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।




