Saraikela (संजीव मेहता) : स्टील सिटी के नाम से पहचाने जाने वाले जमशेदपुर में वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ता जा रहा है. जो अब गंभीर चिंता का विषय बन चुका है. शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 200 के पार पहुंच गया है, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है और आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना जाता है.
हैरानी की बात यह है कि भौगोलिक दृष्टि से दिल्ली की तुलना में बेहतर स्थिति में होने के बावजूद जमशेदपुर में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है. प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के हालिया आंकड़ों के अनुसार शहर में PM 2.5 और PM 10 जैसे सूक्ष्म कणों की मात्रा में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है. ये कण फेफड़ों और हृदय से जुड़ी बीमारियों का मुख्य कारण माने जाते हैं..

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ते प्रदूषण के पीछे औद्योगिक गतिविधियां प्रमुख कारण है. स्टील प्लांट, फैक्ट्रियां, भारी वाहनों की आवाजाही और निर्माण कार्यों से निकलने वाला धुआं व धूल वायु गुणवत्ता को लगातार खराब कर रहे हैं. इसके साथ ही वाहनों की बढ़ती संख्या और हरित क्षेत्रों में कमी भी स्थिति को और गंभीर बना रही है. डॉक्टरों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ेगी. आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ, खांसी और एलर्जी जैसी समस्याएं पहले से ही बढ़ने लगी है. पर्यावरणविदों ने प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की है. औद्योगिक इकाइयों की नियमित निगरानी, प्रदूषण नियंत्रण मानकों का सख्ती से पालन, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा और अधिक से अधिक पौधारोपण जैसे उपायों पर जोर दिया जा रहा है. जमशेदपुर के लिए यह समय चेतने का है, यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्टील सिटी भी दिल्ली की तरह गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में आ सकती है, जिसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा.




