दिल्ली ( प्रतिक सिंह ) : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बोधगया मंदिर प्रबंध अधिनियम, 1949 से संबंधित एक याचिका पर विचार करने से मना कर दिया। यह याचिका पूर्व महाराष्ट्र राज्य मंत्री और अधिवक्ता सुलेखाताई कुम्भारे द्वारा दाखिल की गई थी, जिसमें महाबोधि मंदिर का संपूर्ण नियंत्रण बौद्ध समाज को सौंपने की अपील की गई थी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से भी इस मांग को समर्थन प्राप्त था।

9 अप्रैल 2025 को यह मामला सर्वोच्च अदालत में प्रस्तुत किया गया था, जिसमें याचिकाकर्ता ने महाबोधि महाविहार का संचालन केवल बौद्ध समुदाय के हाथों में दिए जाने की बात कही थी। उन्होंने तर्क दिया कि यह स्थल बौद्ध धर्म का पवित्र तीर्थ है और इसका प्रशासन उसी समुदाय के पास रहना चाहिए जो इसकी आस्था से जुड़ा है। हालांकि, न्यायालय ने इस मुद्दे पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा कि यह मामला न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा से बाहर है। अदालत के इस रुख से याचिकाकर्ताओं को निराशा हाथ लगी। अब इस विषय को लेकर अन्य संवैधानिक या विधायी विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।




