रांची : शिपिज त्रिवेदी ने एडजुडिकेटिंग प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत होकर बताया कि ईडी द्वारा बरामद की गई स्वर्ण ईंट उनके पूर्वजों की संपत्ति है और इसका कोई आपराधिक स्रोत नहीं है। वे तीन अलग-अलग कंपनियों में निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। ईडी ने अक्टूबर 2024 में झारखंड के शराब घोटाले को लेकर छापेमारी की थी, जिसमें कई अधिकारियों और व्यवसायियों के ठिकानों की तलाशी ली गई।

इस कार्रवाई में शिपिज त्रिवेदी के आवास से लगभग 20.79 लाख रुपये मूल्य की स्वर्ण ईंट और सिक्के जब्त किए गए। श्रीलैब ब्रुअरीज, जो इस मामले में एक प्रमुख इकाई है, के स्थानों से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए। गजेंद्र सिंह ने सुनवाई में तर्क दिया कि उनके पास से मिली वस्तुएं किसी भी गलत तरीके से अर्जित नहीं थीं। विनय चौबे ने इस मामले में अपना कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। उत्पाद विभाग के अधिकारी ने नीति परिवर्तन को मंत्रिपरिषद के निर्णय से जोड़ते हुए खुद को जिम्मेदार नहीं बताया। ईडी ने जब्त की गई सामग्रियों को निर्णायक साक्ष्य मानते हुए स्थायी रूप से अपने नियंत्रण में रखने की अनुमति मांगी थी, जिसे प्राधिकरण ने स्वीकार कर लिया। जांच प्रक्रिया अभी भी जारी है।




