रांची : हाल ही में डीजीपी के आदेश के तहत, जमशेदपुर और सरायकेला खरसावां जिलों में आठ वर्षों से सेवा कर रहे पुलिसकर्मियों को चाईबासा जैसे उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में भेजने का निर्णय विवादों का कारण बन विवादों और चर्चाओं में है। कोल्हान प्रमंडल में यह एक चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि 40 प्लस उम्र के अधिकतर पदाधिकारी और जवानों को उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया जा रहा है। इनमें से कई अधिकारी और जवान शारीरिक रूप से अस्वस्थ हैं, कुछ पहाड़ पर चढ़ नहीं सकते, दौड़ नहीं सकते और शारीरिक फिटनेस की दृष्टि से भी कमजोर हैं। ऐसे जवानों और अधिकारियों से उग्रवाद समाप्त करने की उम्मीद करना एक ना उम्मीद और सवाल खड़ा हो गया है । सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 45 प्लस उम्र के पुलिसकर्मी, जिनमें से कुछ शारीरिक रूप से फिट नहीं हैं, उग्रवाद के खिलाफ प्रभावी रूप से संघर्ष कर सकते हैं? क्या सरकार और डीजीपी यह मानते हैं कि इन अधिकारियों और जवानों की विशेषज्ञता और अनुभव के कारण वे उग्रवाद की चुनौती को प्रभावी रूप से हल कर सकते हैं? क्या यह निर्णय सिर्फ उनकी विशेषज्ञता और अनुभव पर आधारित है। वहीं, दूसरी ओर, युवा और शारीरिक रूप से सक्षम जवानों को उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों से दूर रखा जा रहा है।

यह स्थिति यह सवाल उठाती है कि क्यों ऐसे जवानों को, जो शारीरिक रूप से अधिक फिट और सक्रिय हैं, उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में तैनात नहीं किया जा रहा है? क्या नीति बनाने में कही असंतुलन तो नहीं हुई है, या यह निर्णय केवल कुछ प्रशासनिक कारणों से लिया गया है? जबकि सरकार और डीजीपी का उद्देश्य उग्रवाद को समाप्त करना है, तो सही नीति और योजना के तहत उन यंग पदाधिकारीयों जवानों की ऊर्जा और क्षमता का पूर्ण उपयोग कर उग्रवाद पर अंकुश लगाया जा सकता है, जो उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र से दूर है।
जो इस कठिन कार्य में पूरी तरह से सक्षम हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि सरकार और पुलिस प्रशासन इस विषय पर पुनः विचार करें और सुनिश्चित करें कि उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में सही लोगों को तैनात किया जाए, ताकि इस गंभीर समस्या का समाधान हो सके। कोल्हान प्रमंडल में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि यंग पदाधिकारी जवान शहर में रहेंगे और उग्रवाद समाप्त करने के लिए 45 प्लस पदाधिकारीयों जवानों को उग्रवाद क्षेत्र चाईबासा में ड्यूटी करेंगे, जो कोल्हान प्रमंडल में चौक चौराहों पर चर्चा का विषय बना हुआ है




