रांची: राज्य के विभिन्न जिलों के थाने के थानेदारों अपनी सरकारी मोबाइल अधीनस्थ पदाधिकारी को दे रखे रहते हैं । जिसके कारण समय पर थानेदार से बात नहीं हो पाती है। थानेदार द्वारा सरकारी मोबाइल नंबर का सही ढंग से उपयोग न किया जाना एक गंभीर प्रशासनिक समस्या बनती जा रही है। यह मोबाइल नंबर जनता एवं उच्चाधिकारियों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से दिए जाते हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति या प्रशासनिक कार्य में बाधा न आए और पारदर्शिता बनी रहे। परंतु वर्तमान में समय में यह देखने सुनने में आ रहा है कि अनेक थानेदार अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को यह सरकारी मोबाइल सौंप देते हैं, जिससे वे स्वयं जिम्मेदारी से बच जाते हैं।
जनता को जब किसी समस्या को लेकर थाने से संपर्क करना होता है, तो सरकारी नंबर पर कॉल करने पर अधीनस्थ कर्मी ही फोन उठाते हैं। इससे नबातचीत का उद्देश्य पूरा नहीं होता, बल्कि कई बार अधीनस्थ कर्मी यह कहकर टाल देते हैं कि “बड़ा बाबू से बात कीजिए” या “साहब व्यस्त हैं। इसका सीधा असर जनता की समस्याओं की सुनवाई पर पड़ता है।
इस संदर्भ में आम जनता एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार उच्च अधिकारियों की मिलकर शिकायत किए गए हैं ।परंतु स्थिति जस की तरह ही बनी हुई रह रही है। वही एक विधायक ने भी संबंधित वरीय पुलिस अधीक्षक से मिलकर शिकायत दर्ज कराई कि थानेदारों द्वारा सरकारी मोबाइल का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि थानेदार स्वयं इन सरकारी मोबाइलों को अपने पास रखें और जनता की समस्या को सुनिश्चित रूप से सुने। इससे न केवल जनता को संतोष मिलेगा, बल्कि पुलिस प्रशासन की छवि भी सकारात्मक बनेगी।

जनता को अक्सर यह शिकायत रहती है कि उनकी समस्याएं संबंधित थानेदार तक नहीं पहुँचतीं या फिर उनके द्वारा समय नहीं दिया जाता। यह स्थिति आम लोगों में पुलिस प्रशासन के प्रति निराशा की भाव उत्पन्न करती है। पुलिस प्रशासन का दायित्व है कि वह जनता से सीधे संवाद में रहे और पारदर्शिता बनाए रखे।
इसलिए यह अत्यंत आवश्यक हो गया है कि पुलिस अधीक्षक जैसे उच्चाधिकारी इस विषय को गंभीरता से लेते हुए थानेदारों को निर्देशित करें कि वे सरकारी मोबाइल अपने पास ही रखें और जनता की बातों को प्राथमिकता दें। इससे न केवल प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार आएगा, बल्कि जनता का पुलिस पर भरोसा भी बढ़ेगा। जिम्मेदारों की व्यवहार ही प्रशासन की रीढ़ होता है। इस पूरे मामले में उच्च अधिकारी के निर्देश क्या रंग लाते हैं ,यह तो वक्त ही बताएगा कि जिम्मेदार अपने पास सरकारी मोबाइल रखेंगे या यूं ही अधीनस्थों को देते रहेंगे।




