रांची :झारखंड के राज्यपाल एवं कुलाधिपति संतोष गंगवार ने कोल्हान विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह में कहा कि प्रदेश की उच्च शिक्षा प्रणाली के सामने दो प्रमुख बाधाएँ हैं—अकादमिक कैलेंडर का बिगड़ना और शिक्षकों की संख्या का अत्यधिक कम होना। उनके अनुसार, विश्वविद्यालयों में पढ़ाई का क्रम तय समय पर पूरा होना चाहिए, जिससे विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र देर से न मिले और उनकी आगे की तैयारी प्रभावित न हो।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि परीक्षाएँ तय तिथि पर हों और परिणाम भी बिना विलंब के घोषित किए जाएँ, तो युवाओं को प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं तथा रोजगार के अवसरों में भरोसेमंद आधार मिलता है। लगातार सत्र पीछे खिसकने से छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है, क्योंकि समय पर योग्यता प्रमाण न मिलने से उन्हें अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

राज्यपाल ने यह भी स्वीकार किया कि महाविद्यालयों में अध्यापकों की कम उपलब्धता शिक्षण की गुणवत्ता को कमजोर कर रही है। इस स्थिति के समाधान के लिए शासन और राजभवन मिलकर विकल्प खोज रहे हैं, ताकि शैक्षणिक संस्थानों में आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराया जा सके। उनका कहना है कि शिक्षा तंत्र को समयबद्ध और सशक्त बनाना ही उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिससे विद्यार्थियों को सुगम और प्रभावी शिक्षण वातावरण मिल सके।




