रांची : सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में स्थित जागृति मैदान इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है। नगर निगम द्वारा यहां प्रशासनिक भवन निर्माण की घोषणा के बाद पार्षदों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। एक पक्ष इस निर्माण को शहर के विकास और प्रशासनिक सुविधा के लिहाज से जरूरी बता रहा है, तो वहीं दूसरा पक्ष इसे बच्चों और आम नागरिकों के एकमात्र खुले मैदान पर अतिक्रमण मानते हुए विरोध कर रहा है।
समर्थन करने वाले पार्षदों का तर्क है कि नगर निगम के पास एक सुसज्जित प्रशासनिक भवन का अभाव है, जिससे कार्यों के निष्पादन में कठिनाई होती है। उनका कहना है कि यदि जागृति मैदान के एक हिस्से में भवन बनता है, तो इससे क्षेत्र का विकास होगा और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। वहीं विरोध करने वाले पार्षदों का कहना है कि तेजी से शहरीकरण के बीच पहले ही खुले मैदानों की कमी हो चुकी है, ऐसे में इस मैदान को बचाना जरूरी है ताकि बच्चों और युवाओं को खेलने-कूदने और सामाजिक गतिविधियों के लिए स्थान मिल सके।

इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। दोनों पक्ष अपने-अपने जनाधार को मजबूत करने के लिए आम जनता से समर्थन जुटाने में लगे हैं। जनसभाएं, बैठकों और अपीलों के माध्यम से अपनी-अपनी बात को सही साबित करने की कोशिश की जा रही है। इससे पार्षदों के बीच गुटबाजी और वर्चस्व की लड़ाई और तेज हो गई है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए खुफिया विभाग भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है, ताकि किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या न उत्पन्न हो। प्रशासन की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि विवाद शांतिपूर्ण ढंग से सुलझे और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर निगम इस विवाद का समाधान किस तरह निकालता है। क्या प्रशासनिक भवन का निर्माण होगा या मैदान को यथावत रखा जाएगा—यह आने वाला वक्त ही बताएगा । लेकिन यह स्पष्ट है कि इस मुद्दे ने न सिर्फ पार्षदों के बीच मतभेद बढ़ाए हैं, बल्कि आम नागरिकों को भी दो खेमों में बांट दिया है। ऐसे में जरूरी है कि सभी पक्ष संवाद और सहमति के माध्यम से ऐसा समाधान निकालें, जिससे विकास और जनहित दोनों का संतुलन बना रहे। वही इस पूरे मामले पर जिला से लेकर राज्य के पदाधिकारीयों के भी निगाहे बनी हुई है।




