रांची : विशेष सीबीआई अदालत ने झारखंड की तीन कोयला खदानों (बृंदा, सिसई, मेराल) के आवंटन में अनियमितताओं के मामले में अभिजीत इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। तत्कालीन प्रबंध निदेशक मनोज कुमार जायसवाल को चार साल और निदेशक रमेश कुमार जायसवाल को तीन साल सश्रम कारावास की सजा दी गई। अदालत ने कंपनी पर 30 लाख रुपये और दोषियों पर अलग-अलग जुर्माने लगाए। मनोज पर 15 लाख रुपये, जबकि रमेश पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। दोषियों ने कोयला खदानों के आवंटन के लिए इस्पात मंत्रालय को जाली दस्तावेज सौंपकर सिफारिश प्राप्त की थी। अदालत ने इन कृत्यों को धोखाधड़ी (धारा 420), जाली दस्तावेजों का उपयोग (धारा 471), और आपराधिक षड्यंत्र (धारा 120-बी) के तहत दंडनीय पाया।

मनोज को सजा सुनाए जाने के बाद जेल भेज दिया गया, जबकि रमेश को 60 दिनों की जमानत मिली ताकि वह उच्च न्यायालय में अपील कर सके। सीबीआई ने 2020 में आरोप पत्र दाखिल किया था, जिसमें इन अनियमितताओं का खुलासा हुआ। न्यायाधीश ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसे अपराध न केवल सरकारी तंत्र को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि सार्वजनिक संसाधनों के अनुचित उपयोग का कारण बनते हैं।




