रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के *झारखंड स्टेट इंप्लायमेंट ऑफ लोकल कैंडिडेट्स इन प्राइवेट सेक्टर कंपनी एक्ट-2021* पर रोक लगा दी है, जिसमें निजी कंपनियों में 75% नौकरियां स्थानीय लोगों को देने का प्रावधान था। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायमूर्ति दीपक रोशन की पीठ ने यह आदेश झारखंड स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (जेसिया) की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा। अब मामले की अगली सुनवाई 20 मार्च को होगी। याचिकाकर्ता के वकीलों ने अदालत को बताया कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 19 (व्यवसाय करने की स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि हरियाणा सरकार के समान कानून को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पहले ही रद्द कर दिया था। वकीलों ने यह भी कहा कि निजी कंपनियों पर इस तरह के आरक्षण का दबाव डालना संवैधानिक नहीं है और इससे कारोबार करने में बाधा होगी।

झारखंड सरकार ने 2021 में इस कानून को लागू किया था, जिसमें निजी क्षेत्र की कंपनियों में 40,000 रुपये तक की वेतन सीमा वाले पदों पर 75% स्थानीय नियुक्तियां अनिवार्य की गई थीं। सरकार का तर्क था कि यह कानून राज्य के स्थानीय लोगों को रोजगार सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। हालांकि, जेसिया का कहना है कि यह कानून असंवैधानिक है और निजी कंपनियों की स्वायत्तता में हस्तक्षेप करता है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मामले पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले में कोर्ट का अंतिम निर्णय निजी क्षेत्र में रोजगार के प्रबंधन और आरक्षण के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण नजीर स्थापित करेगा।




