
रांची : (शिवपूजन सिंह )- मोदी सरकार के 3.0 का पहला बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश तो किया, लेकिन इसमे खास उतना कुछ नहीं रहा, जो उम्मीद नौकरी पेशा लोगों को टैक्स में बड़ी राहत को लेकर थी की कर छूट 3 लाख से बढाकर 5 लाख किया जायगा. पर इस पर कुछ नहीं हुआ. माध्यम वर्ग को इससे निराशा ही हाथ लगी। इस बजट में ऐसा कुछ नहीं रहा, जिससे खुशी मनाने और उछलने वाली सौगात मोदी सरकार ने दी हो। विपक्ष तो इसे लेकर हंगामा कर रही है। इस बजट में जहां तक बात राज्यों के सौगात की है, तो बिहार और आंध्र -प्रदेश के अलावा किसी राज्य को कुछ नहीं मिला। बिहार और आंध्र-प्रदेश को फायदा मिलने की वजह गठबंधन की मज़बूरी मानी जा रही है. नीतीश और चंद्रबाबू को ख़ुश करने की कवायद ही इसमे ज्यादा दिखाई पड़ी.ताकि पांच साल तक मोदी सरकार के सामने कोई अड़चन, उलझन और दिक्क़त न हो। बिहार और आंध्र प्रदेश विशेष राज्य के दर्जा की मांग तो लंबे समय से करते आ रहें है. लेकिन, मोदी सरकार ने उनकी इस मांग को तो किनारे किया. लेकिन एक बड़ा पैकेज देकर उन्हें चुप करने की कोशिश जरूर की है. इसके चक्कर में बाकी राज्यों का बंटाधार हो गया।
बिहार को 58 हजार तो आंध्र को 15 हजार करोड़ के विशेष पैकेज का ऐलान किया गया। सबसे हैरानगी तब हुई कि जब इस साल के आखिर में झारखण्ड, महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने है. लेकिन, इन राज्यों को तो उतना और विशेष कुछ मिला ही नहीं, इसे लेकर ही अंदर -अंदर और बाहर -बाहर विरोध के सुर भी उठने लगे हैं।
झारखण्ड में बीजेपी की सरकार नहीं है। भाजपा की पुरजोर कोशिश सत्ता में वापसी को लेकर है. अमित शाह से लेकर शिवराज सिंह चौहान जैसे कद्दावर नेता यहां जमे हुए है. ताकि हेमंत सरकार को बेदखल किया जाए. लेकिन बजट में कुछ खास इस प्रदेश को नहीं देना भाजपा को उल्टा विधानसभा चुनाव में पड़ सकता है.इसे लेकर झारखण्ड कांग्रेस ने हल्ला भी केंद्र पर बोला है कि इस प्रदेश की उपेक्षा की गई है. लाजमी है कि इस बजट को लेकर विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा जोर -शोर से बनेगा. इंडिया गठबंधन पहले ही इसे लेकर दिल्ली में हंगामा खड़ा किए हुए है।
जहां तक सवाल झारखण्ड का है तो पूर्वदय योजना जिसे सरकार ने विकास भी विरासत भी नाम दिया है.इसके तहत जिन पांच राज्यों को इसमे शामिल किया गया है, इसमे बिहार, आंध्र प्रदेश, बंगाल, ओड़िशा के साथ झारखण्ड का नाम भी शामिल है.यानि झारखण्ड के लिए कुछ विशेष नहीं है. इस योजना में भी बिहार और आंध्र प्रदेश शामिल है. यानि, मोदी सरकार ने इन दो राज्यों पर ही मेहरबानी दिखाई।
इसके साथ ही इस बजट में वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री ने जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान शुरू करने की बात कही. इसके तहत 63 हजार गांवो के 5 करोड़ आदिवासियों के लाभान्वित होने की बात कही गई. लेकिन, ये योजना भी केवल झारखण्ड के लिए न होकर राष्ट्रीय है. इसके सिवा इस प्रदेश के दामन में कुछ भी नहीं आया और न ध्यान ही दिया गया। अभी विधानसभा चुनाव के मौक़े पर झारखण्ड की झोली में कुछ नहीं देना, एक मायूस करने वाली बात तो है ही. यहां सवाल है कि भाजपा की सरकार ने चुनाव होने वाले राज्यों में आखिर तवज्जो क्यों नहीं दी? क्या केंद्र ने अपनी सल्तनत को पांच साल तक बचाने के लिए ऐसा किया? अगर ऐसा है तो फिर इसका असर तो अच्छा नहीं पड़ने वाला है।
इस बजट से उम्मीदें तो इस आदिवासी बहुल राज्य की केंद्र से बहुत थी. इसे लकेर बड़ी -बड़ी बाते भी की गई थी और वादों की फेहरिश्त भी गिनाई गई थी . प्रश्न यही है कि इस बजट का कितना असर इस चुनाव में देखने को मिलता हैं, क्योंकि हेमंत सरकार को तो मुद्दा अच्छा मिल गया हैं और अपने चुनावी अभियान में इसे लेकर भाजपा पर हमले भी तेज़ करेगी. वैसे भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले से ही बीजेपी के लिए आँखों की किरकिरी बने हुए है।




