सरायकेला / जमशेदपुर : कोल्हान क्षेत्र में बढ़ते अपराधी घटनाओं के बीच लोग अक्सर पूर्व कोल्हान डीआईजी अजय लिंडा को याद कर रहे हैं। पूर्व कोल्हान डीआईजी अजय लिंडा के कार्यकाल में अपराधियों पर कड़ा नियंत्रण था, और अपराधों पर शीघ्र और सख्त कार्रवाई की जाती थी। उनकी खुफिया तंत्र काफी मजबूत थी, और वे खुद भी अपराधियों पर कार्रवाई के लिए सक्रिय रूप से घटनास्थल पर पहुंचते थे। अजय लिंडा के समय में अपराधियों के खिलाफ कड़ी मुहिम चलाई जाती थी। जिससे अपराधीक घटनाओं में कमी आई थी। आज भी लोग जब भी अपराधों के शिकार होते हैं, तो अजय लिंडा को याद करते हैं। आदित्यपुर थाना क्षेत्र में घटित एक हत्या की घटना को लेकर अजय लिंडा दो दिन आदित्यपुर में कैंप करते हुए। जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां जिले के पुलिस पदाधिकारी के साथ बैठक कर ,शीघ्र मामले को उद्वेदन किया गया था। इस समय कोल्हान क्षेत्र में अपराध की घटनाएं लगातार घट रही हैं, और रविवार की रात जमशेदपुर में दो प्रमुख घटनाएं सामने आई है। पहली घटना मानगो थाना क्षेत्र में घर में घुसकर ट्रांसपोर्टर संतोष सिंह की गोली मार कर हत्या की है, जबकि दूसरी घटना बिष्टुपुर थाना क्षेत्र की है। यहां मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल के पास रहने वाले रमेश कांवटिया के घर में अपराधियों ने डकैती की घटना को अंजाम दिया है। अपराधियों ने घर में मौजूद बुजुर्गों को बंधक बना लिया और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद घर में रखे जेवरात और अन्य कीमती सामान लूटकर फरार हो गए। बुजुर्ग दंपति के अनुसार अपराधी पार्सल देने के बहाने घर में घुसे और फिर उनका हाथ-पैर और मुंह बांधकर उन्हें आंखों में पट्टी बांध दी। बुजुर्गों के अनुसार अपराधियों की संख्या पांच थी और लूट के बाद घर से फरार हो गए।

घटना के बाद पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। इस प्रकार की बढ़ती घटनाओं को देखकर क्षेत्रीय लोग यह मानते हैं कि अजय लिंडा के समय में अपराधियों पर लगाम लगी थी। वे अपनी पुलिस टीम के साथ मिलकर घटना स्थल पर पहुंचकर अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करते थे। उनकी कार्यप्रणाली और पुलिस के साथ उनकी सक्रिय भागीदारी से अपराधियों में डर बना रहता था। जो अब नहीं दिखाई दे रहा है। ऐसे में स्थानीय लोग चाहते हैं, कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए, ताकि वे अपने इलाके में सुरक्षित महसूस कर सकें। अजय लिंडा के समय में जब किसी अपराधीक घटना की जानकारी मिलती थी। तो वह त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए अधिकारियों को सक्रिय रूप से दिशा-निर्देश देते थे, और खुद भी घटना स्थल पर मौजूद रहते थे। इसके परिणामस्वरूप अपराधियों पर सख्त नियंत्रण और गिरफ्तारी होती थी। आज जब ऐसी घटनाएं हो रही हैं,तब लोग अजय लिंडा की कार्यशैली और उनकी सक्रियता को याद कर रहे हैं।



