असम : असम की मीनाक्षी दास ने दुनिया भर में महिलाओं को लेकर बनी सोच को बदलने के लिए अद्वितीय पहल की है। उन्होंने अकेले 64 देशों की 68,000 किलोमीटर लंबी यात्रा बाइक से पूरी की। यह यात्रा न सिर्फ भौगोलिक सीमाओं को पार करने की मिसाल है, बल्कि सामाजिक बंधनों को भी चुनौती देती है।

मीनाक्षी बताती हैं कि समाज में अक्सर यह धारणा होती है कि महिलाएं अपने जीवनसाथी के बिना कुछ बड़ा नहीं कर सकतीं। लेकिन उन्होंने इस सोच को पूरी तरह खारिज कर दिया। मीनाक्षी की यात्रा केवल रोमांच नहीं थी, बल्कि साहस, आत्मविश्वास और दृढ़ निश्चय की प्रतीक रही। उनकी सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि लद्दाख के उमलिंग ला दर्रे तक अकेले पहुंचना है, जो उन्हें ऐसा करने वाली पहली शख्स बनाता है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान मिला है। मीनाक्षी का यह कारनामा महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। उनके इस कार्य ने यह स्पष्ट किया है कि नारी शक्ति सीमाओं की मोहताज नहीं होती। उन्होंने दिखाया कि अगर इरादे पक्के हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।




