दिल्ली : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष का असर ऊर्जा संसाधनों पर दिख रहा है, खासकर गैस क्षेत्रों पर हमलों के कारण। इससे वैश्विक स्तर पर तकनीकी ग्रेड यूरिया की लागत में तेज उछाल आया है, जो परिवहन क्षेत्र के लिए चिंता का कारण बन गया है। यह पदार्थ BS-6 मानक वाले वाहनों में इस्तेमाल होने वाले डीजल एग्जॉस्ट फ्लुइड के निर्माण में आवश्यक होता है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 से 88 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से मंगाता है, जिसमें खाड़ी क्षेत्र का योगदान प्रमुख है। हाल के समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 484 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 695 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है, यानी लगभग 44 प्रतिशत वृद्धि। देश में भी इसी अवधि में दरों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

भारत में हर साल लगभग 15 से 17 लाख टन खपत होती है, जबकि घरेलू उत्पादन सीमित बना हुआ है। BS-6 श्रेणी के करीब 3 करोड़ वाहन इस पर निर्भर हैं। एक ट्रक सालभर में करीब 3000 लीटर और बस लगभग 2000 लीटर उपयोग करती है, जबकि कारें हर 800 से 1000 किलोमीटर पर लगभग 1 लीटर खर्च करती हैं।





