Saraikela (संजीव मेहता) : आदित्यपुर नगर निगम का चुनाव 23 फरवरी को संपन्न हुआ. 27 फरवरी को नगर निगम के मेयर एवं सभी 35 पार्षदों के परिणाम घोषित कर दिए गए. अब डिप्टी मेयर का चुनाव शेष है, जो 16 मार्च को निर्वाचित पार्षदों के शपथ ग्रहण के बाद संपन्न होंगे. जिस प्रत्याशी को अधिक मत प्राप्त होंगे, वही डिप्टी मेयर का पद संभालेगा. वैसे देखा जाय तो भाजपा संगठन आदित्यपुर में मेयर बनाने के बाद अब डिप्टी मेयर के लिए भी जोड़ घटाव में लगे हैं.
वर्तमान समय में मेयर खुश हैं, पार्षद खुश हैं. 16 मार्च के बाद डिप्टी मेयर भी खुश होंगे. किंतु वास्तविक खुशी इस बात पर निर्भर करती है कि जिन मतदाताओं ने उन्हें चुनकर इस पद के योग्य समझा है, उनकी अपेक्षाओं पर वे पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ कितना खरा उतरते हैं. इस चुनाव में लगभग 50 प्रतिशत मतदान हुआ, जिसके कई कारण हो सकते हैं. एक प्रमुख कारण यह है कि आदित्यपुर नगर पालिका से नगर निगम तक तो पहुंच गया, परंतु आधारभूत सुविधाओं—जैसे पानी, बिजली, सड़क, नाली, सीवरेज, शिक्षा, स्वास्थ्य और सफाई—के क्षेत्र में अपेक्षित विकास नहीं हो सका है. विकास अवश्य हुआ है, परंतु जनता की उम्मीदों से कहीं कम. कुछ मतदाता तो बाहर चले गए और कुछ नगर निगम के कार्य प्रणाली से उदासीन हैं.

जमशेदपुर नगर के विकास से तुलना करें तो वहां का कुछ भाग टाटा समूह तथा कुछ हिस्सा नोटिफाइड एरिया के अंतर्गत आता है. मुख्य सड़कों पर सफाई व्यवस्था दिखाई देती है, परंतु अंदरूनी गलियों की स्थिति में विशेष सुधार नहीं हुआ है. हालांकि पानी, बिजली, सीवरेज, सड़क और ड्रेनेज की आपूर्ति टाटा समूह द्वारा किए जाने के कारण वहां प्रगति स्पष्ट दिखाई देती है. दूरदर्शिता को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार ने आदित्यपुर के विकास हेतु मास्टर प्लान तैयार किया था. संभवतः नगर पालिका, नगर निगम और नोटिफाइड एरिया के विकास की अवधारणा उसी योजना का परिणाम है. इस मास्टर प्लान के निर्माण में बिहार सरकार के तत्कालीन चीफ टाउन प्लानर एके श्रीवास्तव, टाटा स्टील के आर.एन. मास्टर एवं मिस्त्री का विशेष योगदान रहा. बता दें कि किसी भी शहर का मास्टर प्लान “मास्टर लैंड यूटिलाइजेशन प्लान” कहलाता है, जिसमें यह निर्धारित किया जाता है कि कहाँ सड़क होगी, कहाँ उद्योग स्थापित होंगे, कहाँ वाणिज्यिक केंद्र, खेल मैदान, विद्यालय और अस्पताल बनेंगे. जब आदित्यपुर विकास क्षेत्र (AIADA) में परिवर्तित हुआ, तब कुछ वर्षों तक योजना सक्रिय रही, किंतु बाद में प्रगति धीमी पड़ गई. सरकार ने विकेंद्रीकरण के स्थान पर केंद्रीकरण की नीति अपनाई. पहले (AIADA) के गठन के समय बिहार के मुख्य सचिव इसके अध्यक्ष हुआ करते थे, जबकि बाद में झारखंड के विभिन्न प्राधिकारों को मिलाकर रांची में केंद्रीकृत व्यवस्था बना दी गई, जिसका संचालन एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी द्वारा किया जाता है.




