
रांची झारखंड : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल(एनजीटी) के आदेश की अनदेखी कर झारखंड में धड़ल्ले से अवैध तरीके से बालू का उठाव हो रहा है।प्रशासन के नाक नीचे खुलेआम बालू की कालाबाजारी हो रही है. ट्रैक्टर, ट्रक और हाइवा से खुलेआम बालू ढोया जा रहा है।इसके बावजूद न तो प्रशासन इसे रोक पा रहा है, न ही खान विभाग कोई कार्रवाई कर रहा है. परंतु दिखावे के नाम पर कभी- कभार छापामारी कर कुछ गाड़ियों को पकड़ कर जरूर अपनी पीठ प्रशासन थपथपा लेती है। लेकिन आम जनता में इसकी कुछ अलग ही तस्वीर रहती है ,जो लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहता है ,की खुलेआम बालू का अवैध खनन हो रहा है, और कुछ गाड़ियां को प्रशासन पकड़ कर अपना पीठ थपथपा रही है। आम जनता में मैसेज दे रही है कि हम कार्रवाई कर रहे हैं। लेकिन नतीजा ठीक इसके उल्टे दिख रहे हैं। राजधानी रांची से लेकर राज्य के लगभग तमाम जिलों में अवैध बालू उठाव का खुला खेल चल रहा है। जहां तक की राज्य के मुख्यमंत्री के गृह जिले में भी खुलेआम बालू का खेल चल रहा है। जहां प्रशासन ने छापामारी कर गाड़ियों को पड़कर कुछ पर कार्रवाई भी की है। मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के गृह जिला भी किसी से अवैध कारोबार में पीछे नहीं है। एनजीटी ने झारखंड में 10 जून से 15 अक्तूबर तक नदियों से बालू के उठाव पर रोक लगा रखी है. नदियों का इको सिस्टम बनाये रखने के लिए मॉनसून के दौरान हर साल इस अवधि तक बालू के उठाव पर रोक रहती है।यह रोक देश के अन्य राज्यों में भी रहती है. कुछ राज्य इसका पालन भी कर रहे हैं, लेकिन झारखंड में इस आदेश को ताक पर रख कर काम किया जाता है।
हालत यह है कि उन जिलों में भी नदियों से बालू निकाला जा रहा है, जहां घाटों की निविदा तक नहीं हुई है। राज्य में 796 बालू घाट हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार केवल 27 घाटों की ही निविदा हो सकी है। देखना अब यह है की नदी को चीर के बालू माफिया बालू निकालते रहेंगे या मुख्यमंत्री, डीजीपी मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई कर रोक लगा पाते हैं या यूं ही बालू माफिया बल्ले बल्ले करते रहेंगे। इस पूरे मामले को लेकर राज्य के पुलिस महानिदेशक डीजीपी से संपर्क करने का प्रयास किया गया। परंतु समाचार लिखे जाने तक संपर्क नहीं हो पाया।




