प्रतीक सिंह नई दिल्ली : संसद के भीतर लोकतंत्र की भाषा में संवाद चल रहा था, लेकिन संसद मार्ग पर युवाओं की आवाज़ नारे बनकर गूंज रही थी। “दिल्ली चलो” मार्च का आह्वान करते हुए जेएनजी (जॉइंट नेशनल ग्रुप) और विभिन्न छात्र संगठनों ने नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और पारदर्शिता के सवालों को लेकर राजधानी को आंदोलन के केंद्र में बदल दिया। प्रधानमंत्री आवास के घेराव की कोशिश ने माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया।
सुबह से ही देश के कई राज्यों से पहुंचे छात्र, अभिभावक और युवा कार्यकर्ता संसद मार्ग, जंतर-मंतर और विजय चौक के आसपास जुटने लगे। हाथों में तख्तियां थीं—“मेहनत हमारी, सिस्टम तुम्हारा क्यों?”, “डिग्री नहीं, न्याय चाहिए”, और “पेपर लीक पर मौन क्यों?”। जैसे-जैसे भीड़ बढ़ी, पुलिस ने बैरिकेडिंग कड़ी कर दी। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस और छात्रों के बीच तीखा टकराव हुआ। कई घायल हुए और हिरासत में लिए गए, कई गंभीर रूप से घायल हैं, और अस्पतालों में इलाजरत है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धक्का-मुक्की, बैरिकेड तोड़ने की कोशिश और पुलिस की रोकथाम के दौरान कई छात्र और कुछ राजनीतिक कार्यकर्ता घायल हो गए। कुछ को अस्पताल ले जाना पड़ा, जबकि कई नेताओं ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बलपूर्वक रोका गया। पुलिस का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।
यह आंदोलन केवल परीक्षा का मुद्दा नहीं रह गया है; यह व्यवस्था पर भरोसे की परीक्षा बन चुका है। बात यह है कि जिस देश में बच्चों को “कड़ी मेहनत ही सफलता की कुंजी” पढ़ाया जाता है, वहीं लाखों अभ्यर्थी पूछ रहे हैं—“अगर प्रश्नपत्र पहले ही बाजार में घूम रहा हो तो मेहनत किस दरवाजे पर दस्तक दे?”। संसद में नेता एक-दूसरे से जवाब मांग रहे थे, और सड़क पर छात्र उसी जवाब की प्रतीक्षा में नारे लगा रहे थे। लोकतंत्र का दृश्य कुछ ऐसा था—अंदर माइक चालू, बाहर भविष्य बंद।
विपक्षी दलों ने पीएम आवास घेरकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नीट विवाद ने शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को गहरी चोट पहुंचाई है। शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें, आरोप है कि सरकार लगातार “जांच चल रही है” कहकर समय खरीद रही है, जबकि छात्रों का एक-एक वर्ष दांव पर लगा है। दूसरी ओर सरकार समर्थक नेताओं ने कहा कि मामले की जांच एजेंसियां कर रही हैं और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
लेकिन छात्रों का सवाल अब भी वही है—“क्या हर बार पेपर लीक के बाद केवल जांच होगी, या कभी ऐसी व्यवस्था भी बनेगी जहां परीक्षा केंद्र से पहले प्रश्नपत्र व्हाट्सऐप केंद्र तक न पहुंचे?”। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि नीट परीक्षा की निष्पक्षता, पुनर्परीक्षा, पारदर्शी जांच और जवाबदेही पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो देशव्यापी आंदोलन और तेज किया जाएगा।

दिल्ली की सड़कों पर उबलते जवाब और जनता संसद में सुलगते सवाल फिलहाल एक-दूसरे को देख रहे हैं। अब निगाहें इस पर हैं कि क्या यह टकराव किसी नई शिक्षा नीति, कठोर परीक्षा सुरक्षा कानून और जवाबदेह तंत्र का परिणाम बनेगा, या फिर यह भी भारतीय राजनीति की उन फाइलों में दब जाएगा जिन पर लिखा होता है—“मामला विचाराधीन है।






