मीना देवी दिल्ली : बेटियां हमारी जान है, जिस घर में बेटियां हंसती-खिलखिलाती हैं, उस घर में सचमुच खुशियों के फूल बरसते हैं। बेटियां केवल परिवार का हिस्सा नहीं होतीं, बल्कि घर की मुस्कान, अपनापन और संवेदनाओं की सबसे सुंदर पहचान होती हैं। उनकी हंसी से आंगन जीवंत हो उठता है और उनके होने से घर में प्रेम, ममता और सम्मान का वातावरण बना रहता है।

बेटियां अपने माता-पिता की ताकत होती हैं। बचपन में उनकी मासूम बातें घर के हर कोने में खुशियां बिखेरती हैं, तो बड़े होकर वही बेटियां परिवार का सहारा बनती हैं। वे रिश्तों को जोड़ना जानती हैं और हर परिस्थिति में परिवार को संभालने का हुनर रखती हैं। जिस घर में बेटियों को सम्मान, शिक्षा और प्यार मिलता है, वहां हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है।
समाज में लंबे समय तक बेटियों को बोझ समझने की गलत सोच रही, लेकिन आज बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। शिक्षा, विज्ञान, खेल, प्रशासन और सेना तक में बेटियां अपनी मेहनत और क्षमता से नया इतिहास रच रही हैं। इसलिए अब समय आ गया है कि बेटियों को केवल “पराया धन” नहीं, बल्कि परिवार और समाज की सबसे बड़ी पूंजी माना जाए।
सच तो यह है कि बेटियां घर की रौनक होती हैं। उनकी हंसी में ईश्वर का आशीर्वाद छिपा होता है। जिस घर में बेटियां मुस्कुराती हैं, वहां हर दिन त्योहार जैसा लगता है और जीवन खुशियों की महक से भरा रहता है।




