रांची सरायकेला /जमशेदपुर : कोल्हान प्रमंडल, जिसे झारखंड की औद्योगिक और राजनीतिक रीढ़ माना जाता है, आज गंभीर सवालों के घेरे में है। इस क्षेत्र से अब तक चार-चार पूर्व मुख्यमंत्री, तीन सांसद और 12 विधायक जैसे दिग्गज जनप्रतिनिधि हैं। बावजूद इसके कोल्हान में अपराध, अपहरण, अवैध कारोबार फल फूल रहे हैं जिससे कारोबारी परेशान और जनता चिंतित है।सवाल यह है कि इतनी मजबूत राजनीतिक मौजूदगी के बाद भी आखिर कानून-व्यवस्था पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही?
युवा उद्यमी कैरव गांधी के अपहरण की घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। अपहरणकर्ताओं ने इंटरनेट कॉलिंग के जरिए इंडोनेशिया से परिवार से 5 करोड़ की फिरौती मांगी है। इस अपहरण की घटना से कारोबारी व्यवसाईयों, उद्योगपतियों, बुद्धिजीवियों ,एवं आम जनता में चिंताएं सुरक्षा को लेकर बढ़ती जा रही है।

कोल्हान के शहरी इलाकों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। जमशेदपुर, आदित्यपुर, सरायकेला, चाईबासा जैसे क्षेत्रों में चोरी, रंगदारी, फायरिंग और अपहरण की घटनाएं आम होती जा रही हैं। कारोबारी वर्ग सबसे ज्यादा भयभीत और परेशान है। छोटे दुकानदार से लेकर बड़े उद्योगपति तक रंगदारी और धमकी से जूझ रहे हैं। कई मामलों में भय के कारण लोग पुलिस तक जाने से कतराते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में हालात और भी चिंताजनक हैं। अवैध शराब का धंधा कुटीर उद्योग का रूप ले चुका है, जिससे सामाजिक ताना-बाना टूट रहा है। बालू और खनिज के अवैध कारोबार में माफियाओं का नेटवर्क इतना मजबूत हो चुका है कि स्थानीय प्रशासन भी कई बार बेबस नजर आता है। विरोध करने पर ग्रामीणों को धमकियां दी जाती हैं, यहां तक कि हिंसा की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।
राजनीतिक स्तर पर देखें तो कोल्हान की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। चुनाव के समय विकास, रोजगार और सुरक्षा के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन सत्ता में पहुंचते ही जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताएं बदल जाती हैं। जनता सवाल कर रही है कि जब कोल्हान ने राज्य को चार मुख्यमंत्री दिए, तीन संसद, 12 विधायक तक अपनी आवाज पहुंचाई, तो फिर इस क्षेत्र को सुरक्षित और अपराधमुक्त बनाने में ये प्रतिनिधि क्यों नाकाम रहे?
पुलिस प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं। कहीं संसाधनों की कमी तो कहीं राजनीतिक दबाव के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि समय-समय पर अभियान और कार्रवाई होती है, लेकिन वह स्थायी समाधान साबित नहीं हो पा रही। अपराधी पकड़े भी जाते हैं तो कुछ समय बाद फिर सक्रिय हो जाते हैं।
आज कोल्हान की जनता एक ही सवाल पूछ रही है— कब लगेगी अपराध पर लगाम? कारोबारी भयमुक्त वातावरण चाहते हैं, युवा रोजगार और सुरक्षित भविष्य की मांग कर रहे हैं, और आम नागरिक चैन की जिंदगी। अगर जनप्रतिनिधि, प्रशासन और पुलिस ने मिलकर ठोस और ईमानदार पहल नहीं की, तो कोल्हान की यह चिंता आने वाले समय में और गहरी होती चली जाएगी। वही इस पूरे मामले पर राज्य के डीजीपी सकुशल वापसी के लिए कई टीमें बनाई है, और स्वयं इस पर निगाहें रखकर पल-पल की जानकारी ले रही है और निर्देशित कर रही हैं।




